राष्ट्रपति मुर्मू ने गुजरात में समान नागरिक संहिता लागू करने को मंजूरी दी, दूसरा राज्य बना
क्या है खबर?
गुजरात में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कानून को लागू करने की मंजूरी दे दी है। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद, अब गुजरात सरकार कानून को औपचारिक रूप से अधिसूचित करने की तैयारी कर रही है, जिससे राज्य भर में एक समान कानून होगा। गुजरात में UCC लागू होने के बाद यह उत्तराखंड के बाद समान कानून लागू करने वाला दूसरा राज्य बन जाएगा।
कानून
गुजरात विधानसभा ने मार्च में दी थी मंजूरी
गुजरात विधानसभा ने 24 मार्च, 2026 को साढ़े 7 घंटे की लंबी चर्चा के बाद ध्वनिमत से UCC विधेयक पारित किया था। हालांकि, कांग्रेस ने वॉकआउट कर इसे चयन समिति के पास भेजने की मांग की थी।
इस दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा था कि विधेयक गुजरात की बहनों-बेटियों के लिए पेश किया गया है।
उन्होंने कहा कि विधेयक सुनिश्चित करता है कि किसी समुदाय के साथ भेदभाव न हो, यह अधिकार और स्वतंत्रता को प्रतिबंधित नहीं करता है।
विरोध
विपक्ष ने दर्ज कराया था अपना विरोध
गुजरात में विपक्ष ने इस कानून को 'मुस्लिम विरोधी' करार दिया था और आरोप लगाया कि सरकार ने इसे चुनावी लाभ के लिए पारित किया है।
विपक्ष का कहना था कि विधेयक केवल सांप्रदायिक मुद्दों को संबोधित करता है और सत्ताधारी दल के राजनीतिक हितों की पूर्ति करता है।
विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों से पहले भाजपा के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर से निपटने के लिए इस विधेयक को जल्दबाजी में पारित किया है।
कानून
क्या कहता है गुजरात का UCC कानून?
इस कानून में धर्म की परवाह किए बिना विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप को नियंत्रित करने के लिए एक समान कानूनी ढांचा प्रस्तावित किया गया है।
कानून लागू होने के बाद गुजरात में एकीकृत नियमों के तहत विवाह और तलाक की कार्यवाही को नियंत्रित करने वाले नियम सामने आएंगे।
साथ ही, उत्तराधिकार और संपत्ति विरासत के लिए रूपरेखा बनेगी, विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य होगा और बहुविवाह को प्रतिबंधित करने वाले विशिष्ट वैधानिक प्रावधान किया जाएगा।
कानून
राष्ट्रपति से मंजूरी के बाद गुजरात सरकार क्या करेगी?
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून सीधे लागू नहीं होगा, बल्कि अब गुजरात राज्य सरकार को विस्तृत प्रशासनिक नियम बनाने होंगे।
उसे पंजीकरण तंत्र स्थापित करना होगा और प्रावधानों के प्रभावी होने की तिथि निर्धारित करते हुए एक औपचारिक राजपत्र अधिसूचना जारी करनी होगी।
उत्तराखंड में फरवरी 2024 में UCC कानून को मंजूरी मिली थी, जिसे आधिकारिक तौर पर जनवरी 2025 में लागू किया गया था।
बता दें कि UCC भाजपा का एक प्रमुख चुनावी मुद्दा है।