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PM केयर्स फंड में 2025 तक 8,452 करोड़ रुपये जमा, 2 साल बाद खुलासा
प्रधानमंत्री मोदी के PM केयर्स फंड में 2025 तक 8,452 करोड़ रुपये जमा

PM केयर्स फंड में 2025 तक 8,452 करोड़ रुपये जमा, 2 साल बाद खुलासा

लेखन गजेंद्र
Aug 18, 2026
01:27 pm

क्या है खबर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2020 में स्थापित प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन राहत कोष (PM CARES) ने अपनी वेबसाइट पर वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के लिए अपने ऑडिट विवरण अपलोड कर दिए हैं। जारी विवरण से पता चलता है कि 31 मार्च 2025 तक, PM केयर्स फंड के खातों में 8,452 करोड़ रुपये हैं। खातों का ऑडिट 6 अगस्त को किया गया और लेखा परीक्षकों ने 7 अगस्त, 2026 को उन पर हस्ताक्षर किए हैं।

जांच

क्या पता चला?

वेबसाइट पर जारी वित्तवर्ष 2024-25 के विवरण से पता चला कि फंड को दान और जमा पर ब्याज से 1,200 करोड़ रुपये से अधिक प्राप्त हुए।

31 मार्च, 2025 को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए 87 लाख रुपये का व्यय दर्ज किया गया है।

इसमें निधि का एक बड़ा हिस्सा 6,641 करोड़ रुपये, अब सावधि जमा (FD) में रखा गया है, जिससे लगभग 475 करोड़ रुपये ब्याज मिला है।

पहले धन का एक बड़ा हिस्सा बचत खातों होता था।

दान

कहां से कितना मिला दान?

पिछले वित्तीय वर्ष में इस कोष में घरेलू दान लगभग 475 करोड़ रुपये रहा। विदेश से इसमें 92.82 लाख रुपये आया है। इसमें 5.76 करोड़ रुपये का ब्याज मिला है।

फंड में धनराशि बढ़ रही है, जिसका मतलब है कि अब इस कोष में आपात स्थितियों के लिए पर्याप्त वित्तीय भंडार उपलब्ध है।

फंड का कोष 2023-24 में 7,173 करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में 8,452 करोड़ रुपये हो गया है।

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खर्च

कहां खर्च हो रही धनराशि?

PM केयर्स फंड से वित्तीय वर्ष 2023-24 में कुल 15.37 करोड़ रुपये बच्चों से जुड़ी योजनाओं पर खर्च किया गया है, जबकि वित्तीय वर्ष 2024-25 में खर्च की गई धनराशि 87.84 लाख रुपये है।

यह धनराशि किस योजना में खर्च की गई है, इसकी जानकारी नहीं है। यह भी जानकारी नहीं है कि यह धनराशि कैसे और कहां से एकत्रित की गई है और कैसे खर्च किया गया है।

धनराशि खर्च करने के मानदंड भी सार्वजनिक नहीं हैं।

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योजना

क्या है योजना?

PM CARES फंड की स्थापना कोविड-19 के समय 2020 में आपातकालीन संकट से निपटने के लिए की गई थी। पहले 3 वर्षों में इसने 13,000 करोड़ रुपये जुटाए थे।

केंद्र सरकार द्वारा स्थापित होने के कारण इसके CSR निधि शामिल होने की संभावना थी, जिसमें लोगों से वेतन दान करने की अपील की गई थी।

बाद में पता चला कि यह सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है और यह सूचना के अधिकार (RTI) के प्रति जवाबदेह नहीं है।

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