पाकिस्तान ने फिर किया भारतीय मामले में हस्तक्षेप, आसिया अंद्राबी की उम्रकैद की निंदा की
क्या है खबर?
पाकिस्तान ने एक बार फिर भारतीय मामले में हस्तक्षेप की कोशिश की है। उसने आतंकी साजिश के मामले में उम्रकैद पाने वाली आसिया अंद्राबी की उम्रकैद पर बयान दिया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बयान जारी कर आसिया अंद्राबी और उनकी सहयोगी फहमीदा सोफी और नाहिदा नसरीन को सुनाई गई सजाओं की निंदा की। साथ ही, मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर को भारत का अवैध कब्जा बताते हुए अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मानवाधिकारों की ओर ध्यान देने की अपील की है।
बयान
पाकिस्तान ने क्या कहा?
मंत्रालय ने बयान में लिखा, "पाकिस्तान दिल्ली की अदालत द्वारा कश्मीर की जानी-मानी राजनीतिक नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा और उनकी दो साथियों, फहमीदा सोफी और नाहिदा नसरीन को 30 साल की सजा सुनाए जाने को साफतौर पर खारिज करता है। यह एक कठोर कानून, UAPA के तहत दी गई है। यह फैसला इंसाफ की एक बड़ी गलती है और दिखाता है कि भारत के गैर-कानूनी कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (IIOJK) में बुनियादी अधिकारों को दबाया जा रहा है।"
निंदा
राजनीति से प्रेरित है फैसला
मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान इस फैसले को राजनीति से प्रेरित मुकदमों का एक हिस्सा मानता है, जिसका मकसद अलग राय वालों की आवाजों को दबाना और कश्मीरियों के कानूनी अधिकारों की वकालत करने वालों को डराना है। उसने कहा कि सजा से सही प्रक्रिया, न्यायिक आजादी और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं, क्योंकि अंद्राबी लंबे समय से कश्मीर मुद्दे की खुलकर सपोर्ट करती रही हैं। पाकिस्तान का मानना है कि इससे तनाव बढ़ सकता है।
अपील
अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपील
मंत्रालय ने बताया कि पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक मानवाधिकार संगठन समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इस मामले पर ध्यान दें और IIOJK में भारत की हरकतों के लिए उसे ज़िम्मेदार ठहराएं। पाकिस्तान ने कश्मीरी लोगों के पॉलिटिकल, सोशल और मानवाधिकार सुरक्षा की मांग की है, जिसमें बोलने की आजादी और पक्षपात के बिना ट्रायल का अधिकार भी शामिल है। भारत ने अभी इस संबंध में कोई जवाब नहीं दिया है।
पहचान
कौन हैं आसिया अंद्राबी और क्यों मिली है सजा?
अंद्राबी और उसकी 2 सहयोगी प्रतिबंधित संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत (DeM) की सदस्य हैं। यह संगठन जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की मांग करता है। अंद्राबी इसकी प्रमुख है। तीनों को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने, राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत कई धाराओं में आरोपी बनाया गया है। बुधवार को विशेष अदालत ने अंद्राबी को उम्रकैद और फहमीदा-नसरीन को 30-30 साल की सजा सुनाई है। इन्हें 2018 में गिरफ्तार किया गया था।