पर्यावरण NGO की CJI से अपील- टिप्पणी पर पुनर्विचार करें, संविधान का है सवाल
कर्नाटक की एक पर्यावरण संस्था, परिसराकागी नावू, ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से पर्यावरणविदों पर उनकी हालिया टिप्पणी पर फिर से विचार करने को कहा है। CJI ने पर्यावरण कार्यकर्ताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि 'हमें देश में एक भी ऐसा प्रोजेक्ट दिखा दीजिए जहां ये तथाकथित पर्यावरणवादी और कार्यकर्ता कहें कि यह प्रोजेक्ट अच्छा है, देश तरक्की कर रहा है, हमें यह प्रोजेक्ट चाहिए। सब कुछ आप अदालत में घसीटते हैं।' लेकिन संस्था ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि वे तरक्की या विकास के खिलाफ नहीं हैं। उनकी बस यही मांग है कि प्रोजेक्ट्स में पर्यावरण की सुरक्षा के सही उपाय किए जाएं, ताकि लंबे समय तक पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे।
परिसराकागी नावू ने संविधान के अनुच्छेद 51A(g) का हवाला दिया
संस्था ने इस ओर ध्यान दिलाया कि उनका काम तो प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना ही है, जिसकी बात संविधान के अनुच्छेद 51A(g) में भी कही गई है। उन्होंने चामुंडी हिल्स रोपवे और शरवथी पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट जैसे कुछ उदाहरण भी दिए। इन प्रोजेक्ट्स का उन्होंने विरोध भी किया था, क्योंकि इनसे पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो रहा था। संस्था का साफ कहना है कि जिम्मेदार विकास का मतलब है प्रकृति और जनता के स्वास्थ्य का ध्यान रखकर योजना बनाना, न कि सभी पर्यावरण कार्यकर्ताओं को सीधे विकास-विरोधी करार दे देना।