नाेएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले में पुलिस ने बिल्डर को किया गिरफ्तार
क्या है खबर?
ग्रेटर नोएडा में पुलिस ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता (27) की मौत के मामले में बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। अभय विशटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिकों में से एक हैं। पुलिस ने बताया कि मामले में दूसरे मालिक मनीष कुमार की भी तलाश की जा रही है। यह गिरफ्तारी मेहता के परिवार द्वारा 2 रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ मामला दर्ज कराने के बाद हुई है। इस मामले में दोनों बिल्डरों की संलिप्तता सामने आई है।
आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों ने लगाया बचाव प्रयासों में देरी का आरोप
युवराज के परिवार ने आरोप लगाया कि खतरनाक जगह पर बैरिकेड और रिफ्लेक्टर लगाने के बार-बार अनुरोधों को प्रशासन ने अनसुना किया था। चश्मदीद मोहिंदर ने आरोप लगाया कि बचाव कार्य में देरी हुई। समय पर कार्रवाई से मेहता की जान बचाई जा सकती थी। गवाहों ने बताया कि युवराज लगभग 2 घंटे तक अपनी दलदल में धंसती हुई कार की छत पर खड़े होकर जान बचाने की गुहार लगाते रहे, लेकिन बचाव में देरी से उनकी जान चली गई।
कार्रवाई
घटना के बाद विरोध प्रदर्शन और सरकारी कार्रवाई
युवराज की मौत के बाद स्थानीय निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किया और न्याय की मांग करते हुए कैंडल मार्च निकाला। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों और विकासकर्ताओं पर लापरवाही का आरोप लगाया। विरोध प्रदर्शन के जवाब में नोएडा प्राधिकरण ने दुर्घटनास्थल पर बैरिकेड लगा दिए। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी कार्रवाई करते हुए लोकेश एम को नोएडा प्राधिकरण के CEO पद से हटा दिया। इसी तरह जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया गया है।
जिम्मेदार
प्रशासनिक चूक को माना जा रहा है घटना के लिए जिम्मेदार
इस घटना ने प्रशासन की लापरवाही को लेकर व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है। प्रमुख खामियों में सेक्टर 150 में एक सार्वजनिक सड़क के किनारे स्थित खुला गड्ढा था। 20 फुट गहरा यह गड्ढा 2021 में एक मॉल के बेसमेंट निर्माण के लिए खोदा गया था। उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग और नोएडा प्राधिकरण ने भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। दोनों विभागों के अधिकारियों ने इस गड्ढे को न भरे जाने के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहराया है।
कारण
क्यों हुआ यह हादसा?
यह हादसा घटनास्थल पर मौजूद एक 90 डिग्री का तीखे मोड़ के कारण हुआ है। उस क्षेत्र में मजबूत बैरियर, चेतावनी चिह्न और उचित रोशनी का अभाव था। कोहरे के कारण कम दृश्यता ने स्थिति को और भी खतरनाक बना दिया। इसके अलावा, बचाव कार्य के लिए 90 मिनट का समय मिलने के बावजूद आपातकालीन दल छोटी रस्सियों और अनुपलब्ध क्रेनों के कारण संघर्ष करते रहे। कई एजेंसियां घटनास्थल पर पहुंचीं, लेकिन प्रभावी अभियान चलाने में विफल रहीं।
हादसा
क्या है इंजीनियर की मौत का मामला?
युवराज गुरूग्राम स्थित एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। वे शुक्रवार 16 जनवरी की रात घर लौट रहे थे, तभी घने कोहरे के कारण उनकी कार नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र स्थित सेक्टर-150 में निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में गिर गई। बेसमेंट में पानी भरा था और उसके आसपास कोई बैरीकेडिंग और सूचना नहीं थी। इसी में डूबकर युवराज की मौत हो गई। घटनास्थल पर युवराज को बचाने के लिए पहुंची बचाव टीम ठंड के कारण पानी में नहीं उतरी थी।