पहलगाम आतंकी हमले में हाफिज सईद के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल
क्या है खबर?
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के मामले में जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान स्थिति आतंकवादी हाफिज सईद को आरोपी बनाया है। एजेंसी ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर स्थित NIA की विशेष कोर्ट में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है, जिसमें सईद पर व्यक्तिगत रूप से, प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैबा (LeT) और उसके सक्रिय सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के प्रमुख के रूप में उनकी भूमिका के लिए आरोप लगाए हैं।
आरोप
सीमा पार से युद्ध छेड़ने का आरोप
NIA के मुताबिक, सईद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसके खिलाफ भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और सीमा पार साजिश रचने से संबंधित आरोप भी लगाए गए हैं। एजेंसी ने पूरक आरोपपत्र दायर 1,597 पृष्ठों के मूल आरोपपत्र के विस्तार के रूप में दायर किया है। NIA द्वारा वैज्ञानिक जांच और जमीनी परीक्षण के माध्यम से जुटाए गए सबूतों का विवरण है।
आरोपपत्र
पिछले साल दिसंबर में दायर हुआ था मूल आरोपपत्र
जांच एजेंसी ने 15 दिसंबर, 2025 को पाकिस्तानी आतंकवादी संचालक साजिद जट्ट, जुलाई 2025 में 'ऑपरेशन महादेव' के दौरान मारे गए 3 आतंकवादियों और गिरफ्तार किए गए 2 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। ये सभी पहलगाम आतंकी हमले की योजना बनाने, उसे अंजाम देने और उसमें कथित भूमिका के लिए नामित किए गए थे। अनंतनाग जिले के पहलगाम पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के बाद गृह मंत्रालय ने जांच NIA को सौंपी थी।
हमला
भारत में कई हमलों का जिम्मेदार है सईद
गृह मंत्रालय की 2019 की अधिसूचना के अनुसार, सईद भारत में कई बड़े आतंकी हमलों से जुड़ा हुआ है, जिनमें 22 दिसंबर, 2000 को लाल किले पर हमला भी शामिल है। इसमें 2 सेनाकर्मियों सहित 3 लोग मारे गए थे। सबसे बड़ा हमला 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुआ था, जिसमें 25 विदेशियों समेत 166 लोगों की जान गई थी और 235 लोग घायल हुए थे। 5 अगस्त, 2015 को BSF काफिले पर हमले में भी उसका हाथ था।
जानकारी
22 अप्रैल को हुआ था पहलगाम हमला
पहलगाम की बैसरन घाटी में 22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान के आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला कर दिया था। इसमें 26 पुरुष पर्यटकों की जान गई थी। इसके बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया। पाकिस्तान की अपील पर 10 मई को युद्धविराम हुआ।