यासीन मलिक ने कश्मीर अलगाववाद बढ़ाने के लिए पाकिस्तानी राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री से की थी मुलाकात
क्या है खबर?
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली हाई कोर्ट को एक हलफनामा दाखिल कर बताया कि कश्मीरी अलगाववादी यासीन मलिक पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं के संपर्क में था। एजेंसी ने कहा कि मलिक पाकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के संपर्क में रहा और उसने इसका इस्तेमाल कश्मीर में अलगाववाद बढ़ाने के लिए किया था। एजेंसी ने मलिक ने उन तर्कों का जवाब दिया, जिसमें उसने कश्मीर मुद्दा सुलझाने के लिए कई भारतीय प्रधानमंत्रियों द्वारा संपर्क किए जाने की बात कही है।
सुनवाई
भारतीय प्रधानमंत्रियों से मुलाकात से उसके अपराध कम नहीं होते
NIA ने हलफनामे में कहा, "यासिन मलिक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, पाकिस्तानी सीनेटर और मुख्यमंत्रियों के संपर्क में था, जिससे वह भारत के खिलाफ अफवाह और अलगाववादी एजेंडा बढ़ा रहा था।" एजेंसी ने कहा कि मलिक को भारतीय प्रधानमंत्रियों द्वारा बुलाया जाना उसके आतंकी मामले से अलग है और ये तर्क उसे बेगुनाह नहीं बनाते। एजेंसी ने तर्क दिया कि राजनेताओं का मात्र उल्लेख इस तथ्य को नहीं नकार सकता कि मलिक के लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन से संबंध नहीं थे।
सजा
NIA ने यासिन के लिए की है फांसी की मांग
भारत में आतंकवाद के वित्तपोषण के आरोप में मलिक को निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। NIA ने मलिक की सजा बढ़ाने के संबंध में फांसी की मांग करने के लिए याचिका दायर की है, जिस पर सुनवाई हो रही है। मलिक कोर्ट में खुद बहस कर रहे हैं। उन्होंने अपना विस्तृत उत्तरपत्र दायर किया है, जिसमें भारतीय राजनेताओं के साथ मुलाकात का जिक्र है। NIA ने उसी उत्तर पत्र का प्रतिउत्तर दाखिल किया गया था।