मध्य-पूर्व संकट: क्या अब घरेलू सिलेंडरों में दी जाएगी 10 किलोग्राम गैस? जानिए क्या है योजना
क्या है खबर?
अमेरिका-इजरायल के संयुक्त रूप से ईरान पर हमला करने का सबसे बड़ा असर प्रमुख समुद्री मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है। ईरान ने इस मार्ग को बाधित कर दिया है। इससे भारत समेत विभिन्न देशों में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो गई है। इस बीच भारत में द्रवित पेट्रोलियम गैस (LPG) के घटते स्टॉक को देखते हुए सरकारी तेल विपणन कंपनियाें ने 14.2 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडरों में मात्रा कम करने की योजना बनाई है।
योजना
तेल कंपनियों ने क्या बनाई है योजना?
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा संकट को देखते हुए सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडरों में केवल 10 किलोग्राम गैस भरकर देने की योजना बनाई है। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में एक उद्योग अधिकारी के हवाले से लिखा गया है, "हमारा मुख्य उद्देश्य देश में गैस आपूर्ति को संरक्षित करते हुए परिवारों तक इसकी पहुंच बनाए रखना है।" हालांकि, इस सरकार की मंजूरी के बाद ही योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
उद्देश्य
क्या है इस योजना का उद्देश्य?
रिपोर्ट के अनुसार, इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य कम उपलब्ध गैस को अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाना है। कंपनियों के अनुमान के मुताबिक, 14.2 किलोग्राम का एक सिलेंडर औसतन 35-40 दिनों तक चलता है। इसी तरह 10 किलोग्राम का सिलेंडर भी लगभग एक महीने तक चल सकता है। इस कटौती से जो गैस बचेगी, उससे उन घरों की मांग पूरी की जा सकेगी जहां सिलेंडर खत्म होने वाला है। इससे आम लोगों की जरूरत पूरी हो सकेगी।
बदलाव
सिलेंडरों में क्या होगा बदलाव?
रिपोर्ट के अनुसार, तेल विपणन कंपनियों की इस योजना को लागू किया जाता है, तो सिलेंडरों पर कम मात्रा दर्शाने वाला लेबल लगाया जाएगा और कीमतों को भी समायोजित किया जाएगा। हालांकि, कंपनियों को सिलेंडर भरने की प्रक्रियाओं को फिर से व्यवस्थित करना होगा और इस बदलाव को लागू करने से पहले नियामकीय स्वीकृतियों की भी आवश्यकता होगी। अधिकारी इस कदम की राजनीतिक और उपभोक्ता संवेदनशीलता के प्रति भी सचेत हैं और उसकी के आधार पर निर्णय करेंगे।
आपूर्ति
भारत में खाड़ी देशों से होती है 90 प्रतिशत गैस की आपूर्ति
भारत अपनी LPG जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इस आयात की 90 प्रतिशत आपूर्ति खाड़ी देशों से होती है। वर्तमान में युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह बाधित हो गई है। खाड़ी देशों से आने वाले LPG जहाजों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। पिछले सप्ताह केवल 2 जहाज ही भारत पहुंचे थे। इनमें कुल 92,700 टन LPG आई थी, जो भारत की महज एक दिन की खपत के बराबर रही है।
खपत
भारत में रोजाना होती है 93,500 टन गैस की खपत
भारत की रोजाना की LPG खपत लगभग 93,500 टन है। इसमें से 86 प्रतिशत यानी करीब 80,400 टन घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा इस्तेमाल की जाती है। मार्च के पहले पखवाड़े में कुल खपत में 17 प्रतिशत की गिरावट आई थी। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्थिति को चिंताजनक बताते हुए गैस को बचाकर इस्तेमाल करने की सलाह दी है। हालांकि, सरकार का दावा है कि वर्तमान में घरेलू आपूर्ति नियमित है, लेकिन लोगों में घबराहट है।
परेशानी
आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है परेशानी
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट में अभी तक किसी तरह की कमी आने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में उद्योग जगत के अधिकारी चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले हफ्तों में आपूर्ति की स्थिति और खराब हो सकती है, जिससे देश के सबसे महत्वपूर्ण खाना पकाने के ईंधन की आपूर्ति श्रृंखलाओं में से एक को प्रबंधित करने के लिए कड़े उपाय करने पड़ सकते हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तकरार खत्म नहीं हो रही है।