इंजीनियरिंग छोड़ प्राचीन कला को थामा, अब शतवधानी डॉ आर गणेश को मिलेगा 'पद्म भूषण'
क्या है खबर?
प्राचीन कला और भारतीय सांस्कृतिक विरासत में अपनी विशेष छाप छोड़ने वाले शतवधानी डॉ आर गणेश को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया जाएगा। भारत सरकार द्वारा उन्हें यह सम्मान कला, साहित्य और भारतीय ज्ञान प्रणाली के क्षेत्र में उनके अद्वितीय और अविश्वसनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है। इस समारोह का आयोजन 25 मई को दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में किया जाएगा। आइए जानें कि डॉ गणेश कौन हैं।
परिचय
कर्नाटक के साधारण परिवार में हुआ जन्म, पढ़ाई में रहे उत्तम
डॉ गणेश का जन्म 4 दिसंबर, 1962 को कर्नाटक के कोलार में हुआ था। वह एक साधारण परिवार में जन्मे थे, लेकिन बचपन से उन पर रामायण और महाभारत की कहानियों का गहरा असर पड़ा। बड़े हाेकर गणेश बेंगलुरु गए और वहां के एक कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया। प्रसिद्ध भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) से MSc करने के बाद उन्होंने संस्कृत से MA किया। फिर कन्नड़ अवधान कला पर शोध के लिए डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की उपाधि ली।
उपलब्धियां
12 से ज्यादा भाषाओं में निपुण हैं डॉ गणेश
डॉ गणेश का नाम भारत के सबसे बड़े बहुभाषी विद्वान और कवियों में शामिल है। वह 'अवधानम' कला के महान साधक हैं, जिन्होंने विलुप्त हो रही इस प्राचीन कला को पुनर्जीवित करके वैश्विक मंच तक पहुंचाया है। वह हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, प्राकृत, पाली, लैटिन, ग्रीक और इतालवी समेत 12 से ज्यादा भाषाओं में पारंगत हैं और इन भाषाओं में काव्य रचना करने में सक्षम हैं। उन्होंने दर्शनशास्त्र, कला, सौंदर्यशास्त्र, संगीत और संस्कृति पर कई पुस्तकें लिखी हैं।
रचनाएं
डॉ गणेश के महानतम काम
डॉ गणेश ने 1,300 से ज्यादा अष्टावधान और शतावधान किए हैं। शतावधान प्राचीन भारतीय कला है, जो किसी व्यक्ति की स्मरण शक्ति, ध्यान और तेज दिमाग को प्रदर्शित करती है। एक शतावधानी व्यक्ति के सामने 100 अलग-अलग लोग एक साथ 100 सवाल पूछते हैं या अलग-अलग काम करते हैं। उस व्यक्ति को इन सभी 100 सवालों/कामों को बिल्कुल उसी क्रम में (या उल्टे क्रम में) बिना किसी चूक के अंत में सही-सही दोहराना या उनका उत्तर देना होता है।
जानकारी
डॉ गणेश की साहित्यिक रचनाएं
डॉ गणेश 16 संस्कृत काव्य संग्रह, 12 संस्कृत नाटक, 8 कन्नड़ काव्य और 3 कन्नड़ उपन्यास की रचनाएं कर चुके हैं। उन्होंने वेद, उपनिषद और भारतीय सौंदर्यशास्त्र पर व्याख्यान दिए हैं।
पुरस्कार समारोह
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलेगा 'पद्म भूषण' का सम्मान
25 मई को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा डॉ गणेश काे 'पद्म भूषण' से सम्मानित किया जाएगा। इस बार का सम्मान और भी खास माना जा रहा है, क्योंकि भारत सरकार 'पीपुल्स पद्म' यानी 'जनता का पद्म' की भावना पर जोर दे रही है। इसके पीछे सरकार की मंशा छोटे इलाकों की प्रतिभाओं और गुमनाम नायकों तक अपनी पहुंच को बनाना है, जो समाज और कला के क्षेत्र में अपना याेगदान दे रहे हैं।