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कौन हैं संस्कृत को घर-घर पहुंचाने वाले वेम्पति कुटुम्बा शास्त्री, जिनको मिलेगा 'पद्मश्री'?
प्रोफेसर वेम्पति कुटुम्बा शास्त्री को साहित्य और शिक्षा में मिलेगा 'पद्मश्री'

कौन हैं संस्कृत को घर-घर पहुंचाने वाले वेम्पति कुटुम्बा शास्त्री, जिनको मिलेगा 'पद्मश्री'?

लेखन गजेंद्र
May 21, 2026
02:29 pm

क्या है खबर?

आंध्र प्रदेश में जन्मे प्रोफेसर वेम्पति कुटुम्बा शास्त्री (75) को देश के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। शास्त्री को यह पुरस्कार साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए मिलेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 25 मई को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उनको सम्मानित करेंगी। प्रोफेसर शास्त्री मौजूदा समय में तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित श्री चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती विश्व महाविद्यालय (SCSVMV) के कुलाधिपति हैं। आइए, इनके बारे में जानते हैं।

पहचान

कौन हैं वेम्पति कुटुम्बा शास्त्री?

शास्त्री एक प्रमुख भारतीय संस्कृत विद्वान, अकादमिक, प्रशासक और अद्वैत वेदांत, दर्शन, काव्यशास्त्र और वेद अध्ययन के विशेषज्ञ हैं। उनका जन्म 12 अगस्त, 1950 को कृष्णा जिले में स्थित गुड्लवल्लेरु गांव में हुआ था। वे जगन्नाथ और राजलक्ष्मी के पुत्र हैं। उन्होंने आंध्र विश्वविद्यालय वाल्टेयर से विद्याप्रवीण (MA), मद्रास विश्वविद्यालय से शिरोमणि (MA) और राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, दिल्ली से विद्यावारीधि (PhD) की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में MA और योग में स्नातकोत्तर किया है।

सम्मान

शास्त्री को क्यों मिला सम्मान?

शास्त्री को संस्कृत विद्या, भारतीय दर्शन, वेदांत, काव्यशास्त्र और संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार में उनके जीवनभर के उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया है। उन्होंने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने और वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार के लिए 50 वर्ष से अधिक समय तक काम किया। उन्होंने 'स्वयं संस्कृत सीखों' जैसी किताबें लिखी, जिसकी लाखों प्रतियां बिकी और आम लोगों तक पहुंची। वे राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के पहले कुलपति, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और श्रीसोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति रहे हैं।

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सम्मान

50 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित

शास्त्री ने अंतरराष्ट्रीय संस्कृत अध्ययन संगठन (IASS) के अध्यक्ष के रूप में 2006 से 2018 तक काम किया और 4 विश्व संस्कृत सम्मेलनों की अध्यक्षता की। उन्होंने 15 से अधिक पुस्तकें और 50 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित किए और PhD गाइडेंस, अद्वैत वेदांत और काव्यशास्त्र पर विशेष कार्य किया। उन्होंने संस्कृत नाटकों के निर्देशन और बोलचाल की संस्कृत को बढ़ावा देकर संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक समय में प्रासंगिक बनाया है।

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प्राथमिकता

पद्म पुरस्कारों में जमीन से जुड़े लोगों को प्राथमिकता

इस बार पद्म पुरस्कारों के लिए 84 जिलों के कुल 131 लोगों को चुना गया है। इसमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 लोग पद्मश्री के लिए चयनित हैं। आंध्र प्रदेश से गद्दे बाबू राजेंद्र प्रसाद, गरिमेला बालकृष्ण प्रसाद (मरणोपरांत), मगंती मुरली मोहन और वेम्पाटी कुटुंब शास्त्री को पद्मश्री मिलेगा। केंद्र सरकार ने इस बार भी दूरदराज इलाकों की प्रतिभाओं और जमीनी स्तर पर काम कर रहे लोगों को प्राथमिकता दी है।

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