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कौन हैं कांथा कढ़ाई शिल्पकार तृप्ति मुखर्जी, जिन्हें मिलने जा रहा 'पद्मश्री' सम्मान?
मिलिए कांथा शिल्पकार तृप्ति मुखर्जी से

कौन हैं कांथा कढ़ाई शिल्पकार तृप्ति मुखर्जी, जिन्हें मिलने जा रहा 'पद्मश्री' सम्मान?

May 21, 2026
02:20 pm

क्या है खबर?

पश्चिम बंगाल की लोकप्रिय हस्तशिल्प कलाकार तृप्ति मुखर्जी 'पद्मश्री' से सम्मानित होंगी। 25 मई को दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयाेजित एक समारोह में उन्हें देश के सबसे बड़े सम्मान से नवाजा जाएगा। 60 वर्षीय तृप्ति ने कला के क्षेत्र में अपना उत्कृष्ट योगदान दिया है, जिसके लिए उन्हें चुना गया है। उन्होंने पहचान खो रही पारंपरिक कांथा कढ़ाई को न सिर्फ जीवित रखा, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का काम भी किया है।

परिचय

कौन हैं तृप्ति मुखर्जी?

तृप्ति पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के सूरी (सुभाषपल्ली) की रहने वाली हैं। उन्होंने महज 6 साल की उम्र में कांथा कढ़ाई की तरफ अपना रुझान प्रकट किया था और अपनी मां से इसके गुर सीखे थे। 10 साल की उम्र में उन्होंने अपना यह हुनर दूसरों तक बांटना शुरू कर दिया था। उनकी जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आया जब गंभीर बीमारी की वजह से वह बिस्तर पर आ गईं। फिर भी उन्होंने अपने जज्बे को नहीं खाेया।

आत्मनिर्भरता

20,000 से ज्यादा महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

तृप्ति का हुनर कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में काम आया है। उन्होंने राज्य के आदिवासी बहुल गांवों की लगभग 20,000 से ज्यादा महिलाओं को नि:शुल्क कांथा कढ़ाई सिखाई और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है। यही नहीं, उन्होंने भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय के निमंत्रण पर जापान से लेकर यूनाइटेड किंगडम (UK) तक आयोजित प्रदर्शनियों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके इस हुनर की तारीफ कर चुके हैं।

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उद्देश्य

कांथा कढ़ाई को जीवन का उद्देश्य मानती हैं तृप्ति

तृप्ति अपने गृहनर सूरी में ही एक प्रशिक्षण केंद्र चलाती हैं, जो आज कई महिलाओं के लिए वित्तीय स्वतंत्रता का एक बड़ा विकल्प बन चुका है। वह कांथा कढ़ाई को अपनी जिंदगी का उद्देश्य बताती हैं। 'पद्मश्री' मिलने पर तृप्ति ने अपनी खुशी जताते हुए सरकार को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा, "मैं बहुत खुश हूं क्योंकि मैं कई साल से इस पल का इंतजार कर रही थी। मैं इस सम्मान का श्रेय अपने माता-पिता को देती हूं।"

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कांथा कढ़ाई

क्या है कांथा कढ़ाई?

कांथा कढ़ाई मूल रूप से पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की लोक कला है, जिसमें सुई और धागे की मदद से हाथों से कपड़े पर सुंदर चित्रकारी की जाती है। इसके लिए पुराने कपड़ों का इस्तेमाल किया जाता है। इस कढ़ाई में सीधी सिलाई का उपयोग होता है और यह कढ़ाई दोनों तरफ से देखने पर लगभग एक जैसी ही दिखती है। यह कढ़ाई साड़ी, दुपट्टे, बैग और बेड की चद्दर आदि पर की जाती है।

जानकारी

कुल 131 लोगों को मिलेंगे पद्म पुरस्कार

इस बार पद्म पुरस्कारों के लिए सरकार ने छोटे इलाकों की प्रतिभाओं और जमीनी स्तर पर काम कर रहे लोगों को प्राथमिकता दी है। कुल 131 लोगों को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाना है। #PeoplesPadma के तहत कोई भी नामांकन भर सकता है।

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