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मणिपुर के विस्थापित शिविरों में गंदे शौचालय-साड़ी के पर्दे, बदतर हालात में रह रहे पीड़ित
मणिपुर के विस्थापित शिविरों में कुछ इस तरह पर्दे डालकर रह रहे पीड़ित

मणिपुर के विस्थापित शिविरों में गंदे शौचालय-साड़ी के पर्दे, बदतर हालात में रह रहे पीड़ित

लेखन गजेंद्र
Apr 30, 2026
03:27 pm

क्या है खबर?

मणिपुर में पिछले 3 साल से जातीय हिंसा जारी है, जिसके कारण 60,000 से अधिक लोग अपने-अपने घरों को छोड़कर विस्थापित हो चुके हैं। राज्य में प्रशासन की ओर से विस्थापित पीड़ितों के लिए राहत शिविर बनाए गए हैं, ताकि पीड़ित परिवारों के साथ यहां रह सकें, लेकिन इन शिविरों की हालत सही नहीं है। कांग्रेस ने इन शिविरों का जायजा लेते हुए एक वीडियो साझा किया है, जिसमें दिखाया गया कि लोग कितनी बुरी दशा में रह रहे हैं।

शिविर

साड़ी के पर्दों से किया कमरों का बंटवारा

राहत शिविरों में पीड़ित परिवारों के लिए जो शौचालय बनाए गए हैं, वह वीडियो में काफी गंदे दिख रहे हैं। उनको टीन की चादर से बनाया गया है। अंदर कमरों का बंटवारा लोगों ने खुद से साड़ी के पर्दों से कर रखा है, जिससे महिलाएं कपड़े बदल सकें। यह अस्त-व्यस्त दिख रहे हैं। शिविर में रह रही एक महिला ने बताया कि हर महीने 2,300 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से मदद मिलती है, जिससे जरूरी चीजें खरीदती हैं।

ट्विटर पोस्ट

कांग्रेस ने साझा किया वीडियो

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सवाल

कांग्रेस ने उठाया सवाल- क्या प्रधानमंत्री यहां रह सकेंगे?

कांग्रेस ने एक्स पर वीडियो साझा कर लिखा, 'मणिपुर हिंसा ने लोगों को बेघर कर दिया है। अब करीब 60 हजार लोग बीते 3 साल से राहत शिविरों में रह रहे हैं। मणिपुर में लोग नरक जैसे हालात में जी रहे हैं और मोदी को मौज-मस्ती से फुर्सत नहीं मिल रही। क्या नरेंद्र मोदी और भाजपा का कोई नेता ऐसे हालात में एक दिन यहां रह पाएगा? अगर नहीं तो मणिपुर और वहां के लोग ये क्यों झेल रहे हैं?'

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हिंसा

3 मई को मणिपुर हिंसा को होंगे 3 साल

मणिपुर में कुकी-मैतेई समुदाय के बीच 3 मई, 2023 को हिंसा शुरू हुई थी, जो आज तक रुक-रुककर जारी है। हिंसा में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, 1,500 से ज्यादा घायल हुए हैं और करीब 60,000 लोगों को विस्थापित होना पड़ा है। हिंसा नहीं रोक पाने के दबाव में 9 फरवरी, 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने इस्तीफा दिया था। अब यहां 4 फरवरी 2026 से युमनाम खेमचंद सिंह मुख्यमंत्री हैं, लेकिन हालात नहीं बदले हैं।

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