मध्य प्रदेश: इंदौर में दूषित पानी पीने से 8 लोगों की मौत, 100 से अधिक बीमार
क्या है खबर?
पिछले कई सालों से देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब पाने वाला मध्य प्रदेश का इंदौर दूषित पानी की वजह से चर्चा में है। यहां के भागीरथपुरा इलाके में गंदा पानी पीने से 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग बीमार हैं। स्थानीय प्रशासन को हालात की जानकारी तब हुई, जब सोमवार को 100 से अधिक लोग उल्टी-दस्त होने पर अस्पताल पहुंचे थे। घटना से पूरे शहर में हड़कंप मचा हुआ है।
समस्या
पिछले कई दिनों से शिकायत के बाद नहीं जागा प्रशासन
नई दुनिया के मुताबिक, स्थानीय लोग पिछले कई दिनों से स्थानीय प्रशासन को गंदे पानी की आपूर्ति की जानकारी दे रहे थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 26 दिसंबर को उल्टी-दस्त से पहली मौत के बाद भी इलाके में कोई अधिकारी झांकने नहीं पहुंचा। सोमवार को 34 लोगों के भर्ती होने के बाद अधिकारी जागे। चाचा नेहरू अस्पताल में भर्ती 3 वर्षीय बच्चे की रिपोर्ट में हैजा की पुष्टि हुई है। अस्पताल में अभी क्षेत्र के 5 बच्चे भर्ती हैं।
प्रदूषण
कैसे हुई गंदे पानी की आपूर्ति?
रिपोर्ट के मुताबिक, नगर निगम ने मंगलवार को दूषित पानी आपूर्ति की लाइन की जांच की तो पता चला कि जिस मेन लाइन से क्षेत्र में पानी आथा है, उसके ऊपर सार्वजनिक शौचालय बना है। मुख्य लाइन फूटने से शौचालय का गंदा पानी सीधे पेयजल पाइप से मिलकर लोगों तक पहुंचने लगा। क्षेत्र में अन्य जगह भी लाइन टूटी मिली। इसके बाद भागीरथपुरा में नर्मदा नदी के पानी की सप्लाई बंद कर टैंकरों से जल वितरण हो रहा है।
सरकार
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र है इंदौर
इंदौर भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय का विधानसभा क्षेत्र है। भागीरथपुरा का बड़ा हिस्सा इसी में आता है। कैलाश मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में नगरीय विकास और आवास मंत्री हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में सर्वे कराया, जिसमें पता चला कि अधिकतर घरों में उल्टी-दस्त के मरीज हैं। घटना को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दुख जताया और मृतकों के परिवारजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और मरीजों के इलाज का पूरा खर्च उठाने का ऐलान किया है।