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लक्षद्वीप में 47 साल बाद होगी शराब की बिक्री, जानिए सरकार ने क्यों उठाया यह कदम
लक्षद्वीप में 47 साल बाद फिर से होगी शराब की बिक्री

लक्षद्वीप में 47 साल बाद होगी शराब की बिक्री, जानिए सरकार ने क्यों उठाया यह कदम

Jun 08, 2026
07:20 pm

क्या है खबर?

मुस्लिम बहुल केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में 47 सालों में पहली बार लाइसेंस प्राप्त दुकानों के माध्यम से शराब की बिक्री होगी। इसके पीछे कारण केंद्र सरकार द्वारा लक्षद्वीप निषेध विनियमन, 1979 को निरस्त करना है। इस कानून ने लागू होने के बाद से लक्षद्वीप को शराब से मुक्त रखा था। कवरत्ती और बंगाराम द्वीपों पर सरकारी बार और पर्यटक रिसॉर्ट्स के लिए शराब महज अपवाद रहे हैं। आइए जानते हैं सरकार ने यह कदम क्यों उठाया है।

निरस्त

सरकार ने 5 जून को निरस्त किया कानून

सरकार ने लक्षद्वीप निषेध विनियमन, 1979 को 5 जून को जारी राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से निरस्त कर दिया है। उसकी जगह नया उत्पाद शुल्क विनियम, 2026 लागू किया जा रहा है। इसके तहत लाइसेंसिंग प्रणाली लागू की गई है, जिसके अंतर्गत शराब के निर्माण, कब्जे, आयात, निर्यात, परिवहन, खरीद, बिक्री और उपभोग को नियंत्रित किया जाएगा। सरकारी निगमों और एजेंसियों को भी शराब के आयात और खुदरा बिक्री के लिए लाइसेंस की अनुमति दी गई है।

टैक्स

सरकार ने शराब संबंधित टैक्स की दर बढ़ाई

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह खुला शराब बाजार नहीं होगा। शराब से संबंधित टैक्स की दरें काफी अधिक रखी गई हैं। भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) और विदेशी शराब पर उत्पाद शुल्क 400 प्रतिशत, बीयर पर 200 प्रतिशत और वाइन पर 80 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। इससे वहां शराब खरीदना काफी महंगा होगा। बता दें कि दिल्ली में IMFL, बीयर, वाइन और आयातित विदेशी शराब पर 25 प्रतिशत ही वैट लगाया जाता है।

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राहत

लक्षद्वीप प्रशासक को दिए गए हैं व्यापक अधिकार

नए कानून के तहत लक्षद्वीप पूरी तरह से शराब का बड़ा बाजार नहीं बनेगा। सरकार ने लक्षद्वीप के प्रशासक को व्यापक अधिकार दिए हैं। वे केंद्र शासित प्रदेश में शराब की खरीद, बिक्री, सेवन और भंडारण पर सीमाएं तय कर सकते हैं। इसी तरह जरूरत पड़ने पर पूरे लक्षद्वीप या उसके किसी हिस्से में शराब की बिक्री पर रोक भी लगा सकते हैं। इसके साथ ही 21 वर्ष से कम आयु के लोगों को शराब बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

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भौगोलिकता

36 द्वीपों का समूह है लक्षद्वीप

लक्षद्वीप 36 द्वीपों का एक समूह है। इनमें से 10 द्वीप बसे हुए हैं, जिनमें अगत्ती, अमिनी, एंड्रोट, बितरा, चेटलाट, कदमत, कल्पेनी, कावारत्ती, किल्टन और मिनिकॉय शामिल हैं। विदेशी और भारतीय पर्यटकों को विशेष परमिट प्राप्त करने के बाद ही द्वीप समूह का दौरा करने की अनुमति है, जिसमें विदेशी पर्यटकों के लिए अगाटी, बंगाराम और कदमत द्वीप ही सीमित हैं। ऐसे में यहां अब तक पर्यटकों की पहुंच बहुत ही कम रही है।

पाबंदी

लक्षद्वीप में क्यों लगाई गई थी शराब बिक्री पर रोक?

लक्षद्वीप में 97 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है, जो भारत के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में मुस्लिम आबादी का सबसे बड़ा अनुपात है। इसके अलावा यहां की बड़ी आबादी अनुसूचित जनजाति यानी ST श्रेणी में भी आती है। यहां की कुल आबादी 64,473 में 95 प्रतिशत यानी 61,120 लोग अनुसूचित जनताति (SC) वर्ग से संबंधित है। इसी वहज से 1979 में शराबबंदी लागू की गई थी, क्योंकि बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी में शराब को वर्जित माना जाता है।

लागू

दशकों तक लागू रही शराबबंदी

दशकों तक इस कानून को बनाए रखा गया। प्रशासकों का कहना था कि यह स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप है। राजनीतिक दलों और सामुदायिक संगठनों ने भी शराब की उपलब्धता बढ़ाने के प्रस्तावों का विरोध किया। उनका तर्क था कि यह प्रतिबंध स्थानीय सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं की रक्षा करता है। हालांकि, यह प्रतिबंध कभी पूरी तरह लागू नहीं था। पर्यटकों और सरकारी अधिकारियों के लिए कुछ विशेष छूट पहले से मौजूद थी।

कारण

सरकार ने अब क्यों हटाया शराब बिक्री से प्रतिबंध?

इस बड़े बदलाव के पीछे सबसे प्रमुख वजह पर्यटन को माना जा रहा है। केंद्र सरकार लंबे समय से लक्षद्वीप को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है। हालांकि, शराब पर सख्त प्रतिबंध की वजह से लक्षद्वीप हिंद महासागर के अन्य लोकप्रिय पर्यटन स्थलों, विशेष रूप से मालदीव, की तुलना में पिछड़ रहा था। जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे ने भी इस दिशा में नई गति दी है।

पर्यटन

लक्षद्वीप में पर्यटकों की संख्या में तेजी से हुआ इजाफा

लक्षद्वीप में पर्यटकों की संख्या 2020 में केवल 3,875 थी, जो 2024 में बढ़कर 68,328 तक पहुंच गई। यह लगभग 47 प्रतिशत की वृद्धि है। सबसे बड़ा उछाल प्रधानमंत्री मोदी के जनवरी 2024 के दौरे के बाद दर्ज किया गया। केंद्र सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई साल पहले से प्रयास शुरू कर दिए थे। साल 2020 में प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल की नियुक्ति के बाद शराबबंदी में ढील देने की प्रक्रिया तेज हुई।

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