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जमीन के बदले नौकरी मामला: लालू यादव की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में खारिज
जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू प्रसाद यादव की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में खारिज

जमीन के बदले नौकरी मामला: लालू यादव की याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में खारिज

लेखन गजेंद्र
Mar 24, 2026
04:33 pm

क्या है खबर?

जमीन के बदले नौकरी मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख यादव ने याचिका दायर कर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से 2022 में उनके खिलाफ दर्ज की गई FIR को रद्द करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति रविंदर दुदेजा ने कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है।

याचिका

मई 2025 में भी कार्यवाही पर रोक लगाने से किया था इनकार

यादव ने कोर्ट से CBI द्वारा दायर आरोपपत्रों और उन पर संज्ञान लेने वाले निचली अदालत के आदेशों को भी रद्द करने का आग्रह किया था, जिस पर कोर्ट ने कोई संज्ञान नहीं लिया। इससे पहले मई, 2025 में भी हाई कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। मामले में लालू यादव के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी राबड़ी देवी, सांसद बेटी मीसा भारती और बेटे समेत कई अन्य आरोपी हैं।

फैसला

याचिका में लालू ने क्या कहा?

यादव ने अपनी याचिका में कहा कि कथित अपराध 2004-2009 के हैं, लेकिन FIR 14 साल बाद केवल 2022 में दर्ज की गई थी, जो राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने दलील दी कि CBI की जांच अवैध है क्योंकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत आवश्यक अनुमति भी नहीं ली गई थी। बता दें कि इस प्रावधान के तहत लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच से पहले सरकार की मंजूरी जरूरी है।

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आरोप

क्या है जमीन के बदले नौकरी का मामला?

जमीन के बदले नौकरी का मामला 2004 से 2009 का है, उस समय लालू यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि मंत्री रहते हुए लालू ने पश्चिम-मध्य रेलवे के जबलपुर जोन में ग्रुप-D की नौकरी देने के नाम पर लोगों से अपने परिवार और संबंधित एके इंफोसिस कंपनी के नाम पर जमीन कराई थी। मामले में 3 आरोपपत्र दाखिल हुए, जिसमें दूसरी में तेजस्वी यादव का नाम शामिल था। इस फैसले के बाद अब ट्रायल की प्रक्रिया जारी रहेगी।

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