न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा को झटका, लोकसभा अध्यक्ष की जांच समिति के सामने पेश होना होगा
क्या है खबर?
घर के अंदर नकदी मिलने के मामले में फंसे इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और एससी शर्मा की पीठ ने उनकी उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें न्यायमूर्ति वर्मा ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित जांच समिति के सामने पेश होने की समयसीमा बढ़ाने की मांग की थी। पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति वर्मा को 12 जनवरी को समिति के सामने पेश होना होगा।
सुनवाई
याचिका पर फैसला सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को न्यायमूर्ति वर्मा की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष द्वारा गठित 3 सदस्यीय समिति को रद्द करने की मांग की है। अध्यक्ष ने वर्मा के खिलाफ महाभियोग के लिए न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के तहत समिति गठित की है। इसी याचिका में कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। हालांकि, उनकी समयसीमा बढ़ाने की मांग खारिज कर दी। समिति ने वर्मा से 12 जनवरी तक लिखित जवाब मांगा है।
तर्क
पिछले साल अगस्त में स्वीकार हुआ था महाभियोग प्रस्ताव
लोकसभा अध्यक्ष ने अगस्त में न्यायमूर्ति वर्मा मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर उनको न्यायाधीश के पद से हटाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित 3 न्यायाधीशों की आंतरिक जांच में न्यायाधीश दोषी पाए गए थे और उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद केंद्र ने संसद में न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया और 146 सांसदों के हस्ताक्षर वाले प्रस्ताव को अध्यक्ष ने स्वीकार लिया।
घटना
क्या है नकदी मिलने का मामला?
दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश रहते न्यायमूर्ति वर्मा के सरकारी आवास के स्टोर रूम में 14 मार्च आग लगी थी। वर्मा की अनुपस्थिति में उनके परिवार ने अग्निशमन-पुलिस को बुलाया। आग बुझाने के बाद टीम को घर से भारी मात्रा में नकदी मिली। इसकी जानकारी तत्कालीन CJI संजीव खन्ना को हुई तो उन्होंने कॉलेजियम बैठक बुलाकर न्यायमूर्ति वर्मा का स्थानांतरण इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति गठित की, जिसने न्यायमूर्ति वर्मा को दोषी ठहराया।