भारत की 5 लाख करोड़ रुपये की स्वच्छ ऊर्जा दांव पर, जलवायु संकट से 2035 का लक्ष्य डगमगाया
जलवायु परिवर्तन का असर बढ़ते ही भारत का 5 लाख करोड़ रुपये का स्वच्छ ऊर्जा प्रोजेक्ट अब खतरे में आ गया है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 10 राज्यों में फैले 239 गीगावाट के सोलर, विंड और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ और जंगल की आग जैसी भयंकर मौसमी घटनाएं इन्हें नुकसान पहुंचा सकती हैं। अगर इन खतरों से ठीक से निपटा नहीं गया, तो भारत 2035 तक अपनी 60 प्रतिशत बिजली गैर-जीवाश्म ईंधन से पैदा करने का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएगा।
सोलर फार्म्स पर खतरा
सोलर फार्म्स पर खास तौर पर ज्यादा खतरा है। राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में ओले गिरने से इनके पैनल्स को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे बिजली उत्पादन घट जाएगा। सूखे इलाकों में धूल की वजह से समस्या और गंभीर हो जाती है, क्योंकि इससे सोलर पैनल्स की कार्यक्षमता कम होती है और रखरखाव का खर्च भी बढ़ जाता है।
डेवलपर्स भी अब इस बात को समझने लगे हैं कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए तैयार रहना ही उनके प्रोजेक्ट्स को लगातार फंड मिलते रहने और समय पर पूरा करने के लिए बेहद अहम है।