स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन और युद्धपोत INS तारागिरी भारतीय नौसेना में शामिल, जानिए खासियत
क्या है खबर?
भारत ने अपनी समुद्री ताकत बढ़ाते हुए शुक्रवार को स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी INS अरिदमन को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया। पनडुब्बी को कमीशन में शामिल करने का कार्यक्रम विशाखापट्टनम में हुआ, लेकिन इसे गुप्त रखा गया। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत अन्य नौसेना अधिकारी शामिल थे। सिंह ने शुक्रवार को सिर्फ एक्स पर एक लाइन पोस्ट करके जानकारी दी कि, 'शब्द नहीं शक्ति है, अरिदमन!' इससे INS अरिदमन के कमीशन होने का पता चला।
कार्यक्रम
गोपनीय रखा गया कार्यक्रम
दिप्रिंट के मुताबिक, भारत का परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) INS अरिदमन कार्यक्रम एक गोपनीय परियोजना है। इसके कमीशन की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। रक्षा एवं सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों से पता चला कि भारत की तीसरी SSBN को कमीशन कर दिया गया है। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने पिछले साल दिसंबर में कहा था कि INS अरिदमन परीक्षण के अंतिम चरण में है और जल्द सेवा में शामिल होगा।
कार्यक्रम
INS तारागिरी के कमीशन में शामिल हुए रक्षा मंत्री
INS अरिदमन की कोई जानकारी नहीं दी गई, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने एक्स पर स्वदेश निर्मित युद्धपोत 'INS तारागिरी' को विशाखापट्टनम में नौसेना के बेड़े में शामिल होने के कार्यक्रम को कवर किया। इस मौके पर राजनाथ सिंह ने कहा कि आज नौसेना में युद्धपोत तारागिरी शामिल हो रहा है, जो भारत की बढ़ती हुई सामुद्रिक शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि INS तारागिरी की कमीशनिंग नौसेना की ताकत में वृद्धि करेगी।
खासियत
INS अरिदमन की खासियत क्या है?
INS अरिहंत को 2016 और INS अरिघात को 2024 में नौसेना में शामिल करने के बाद INS अरिदमन को शामिल किया जा रहा है। यह उन्नत परमाणु क्षणता से लैस बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी है। इसमें 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जो लंबी दूरी की K-4 मिसाइल और K-15 मिसाइल ले जा सकती हैं। INS अरिदमन 125 मीटर लंबी और 7,000 टन की है, जो समुद्र में गहराई में छिपकर वार कर सकती है। इसे विशाखापत्तनम में बनाया गया है।
खासियत
INS तारागिरी की खासियत
रक्षा मंत्री ने तारागिरी के बारे में बताया कि यह P-17-A श्रेणी की चौथी पोत है। इसे युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो के इंजीनियरों और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने तैयार किया है। यह लगभग 7,000 टन वजन वाला जहाज आकार और क्षमता में भी शक्तिशाली है। यह तेज गति से चल सकता है और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है। इसमें आधुनिक रडार, सोनार, ब्रह्मोस और जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल लगी है।
सेवा
अगले साल सेवा में शामिल होगा चौथा परमाणु पनडुब्बी
INS अरिहंत SSBN परियोजना का पहला पोत था, जिसके बाद INS अरिघात का नंबर आया। INS अरिहंत जुलाई 2009 में लॉन्च हुआ और 2016 में चुपचाप सेवामुक्त हो गया। INS अरिघात अगस्त 2024 में सेवामुक्त हुआ था। INS अरिदमन पहले के दो पनडुब्बियों से ज्यादा शक्तिशाली है। इसी श्रेणी का चौथा परमाणु पनडुब्बी समुद्री परीक्षणों से गुजर रहा है, जो अरिदमन की श्रेणी का है। संभावना जताई जा रही है कि अगले साल इसे सेवा में शामिल किया जाएगा।