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भारतीय गणितज्ञ महेश काकडे ने 2026 का रामानुजन पुरस्कार जीता, संख्या सिद्धांत में किया महत्वपूर्ण कार्य
भारतीय गणितज्ञ महेश काकडे ने 2026 का रामानुजन पुरस्कार जीता

भारतीय गणितज्ञ महेश काकडे ने 2026 का रामानुजन पुरस्कार जीता, संख्या सिद्धांत में किया महत्वपूर्ण कार्य

लेखन गजेंद्र
Oct 07, 2026
02:34 pm

क्या है खबर?

कर्नाटक में बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (IISC) के प्रोफेसर और भारतीय गणितज्ञ महेश काकडे को संख्या सिद्धांत में उनके महत्वपूर्ण कार्य के लिए 2026 का रामानुजन पुरस्कार प्रदान किया गया है। काकडे को बीजगणितीय संख्या सिद्धांत में मौलिक कार्य के लिए, विशेष रूप से संख्याओं के व्यवहार और विभिन्न गणितीय संरचनाओं के आपस में जुड़े होने से संबंधित महत्वपूर्ण समस्याओं को हल करने के लिए मान्यता दी गई थी।

सिद्धांत

क्या है बीजीय संख्या सिद्धांत?

बीजीय संख्या सिद्धांत संख्या सिद्धांत संख्याओं और उनके गुणों का अध्ययन है।

बीजीय संख्या सिद्धांत छिपे हुए पैटर्न और संरचनाओं की खोज करता है जो यह समझा सकें कि संख्याएं ऐसा व्यवहार क्यों करती हैं।

काकडे ने ऐसे परिणाम विकसित किए जिनसे गणितज्ञों को इन परिवर्तनों को समझने में मदद मिली, जिनमें ऐसे मामले भी शामिल हैं जहां सिस्टम सरल, अनुमानित तरीके से व्यवहार नहीं करते हैं।

पहचान

कौन हैं काकडे?

काकडे का जन्म भारत में हुआ है। उन्होंने बेंगलुरु स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान से गणित में स्नातक की उपाधि प्राप्त की, जिसके बाद वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय चले गए।

यहां उन्होंने 2008 में शुद्ध गणित में स्नातकोत्तर और PhD की उपाधि प्राप्त की।

इसके बाद उन्होंने प्रिंसटन विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और किंग्स कॉलेज लंदन में काम किया और 2019 में IISC में प्रोफेसर हुए।

उन्हें 2023 में एशियाई वैज्ञानिकों की 100 सूची में भी शामिल किया गया था।

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पुरस्कार

पुरस्कार के बारे में जानें

वर्ष 2005 में स्थापित रामानुजन पुरस्कार में 10,000 डॉलर का नकद पुरस्कार शामिल है और यह विकासशील देशों में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किए गए असाधारण गणितीय अनुसंधान को सम्मानित करता है।

पुरस्कार युवा गणितज्ञों के लिए इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स (ICTP) और इंटरनेशनल मैथमेटिकल यूनियन (IMU) द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया जाता है।

पुरस्कार 45 वर्ष से कम आयु के उन गणितज्ञों को दिया जाता है, जिन्होंने विकासशील देशों में काम करते हुए उत्कृष्ट शोध कार्य किया है।

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