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भारत-अमेरिका के बीच 2 दिन की बैठक में व्यापार-समझौते पर नहीं बनी बात, क्या है अड़चन?
अमेरिका और भारत के व्यापार प्रतिनिधिमंडल के बीच दिल्ली में बातचीत हुई

भारत-अमेरिका के बीच 2 दिन की बैठक में व्यापार-समझौते पर नहीं बनी बात, क्या है अड़चन?

लेखन गजेंद्र
Jun 25, 2026
10:05 am

क्या है खबर?

अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर 2 दिन से केंद्र सरकार के प्रतिनिधिमंडल से कई दौर की बातचीत कर चुका है, लेकिन अभी तक कोई बात नहीं बनी है। अमेरिकी टीम व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर की अगुआई में 22 जून को दिल्ली आई और 24 जून तक रही। इस दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ उनकी बातचीत हुई। बातचीत के बाद भी अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर कोई नतीजा नहीं निकला।

बैठक

बैठक में क्या हुई बातचीत?

वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि अमेरिकी दौरा संतुलित और पारस्परिक लाभकारी भारत-अमेरिका BTA को आगे बढ़ाने और 7 फरवरी को हुए अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने के लिए महत्वपूर्ण कदम था। बैठक में बेहतर बाजार पहुंच, डिजिटल व्यापार, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला, गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी और रणनीतिक क्षेत्रों में विस्तारित सहयोग जैसे BTA के प्रमुख तत्वों पर चर्चा हुई। दोनों पक्ष संतुलित, व्यावसायिक रूप से सार्थक और अपने-अपने देशों के किसानों-श्रमिकों-उपभोक्ताओं को ठोस लाभ देने वाला समझौता चाहते हैं।

टैरिफ

कहां तक पहुंची बातचीत? 24 जुलाई को अमेरिकी 10 प्रतिशत टैरिफ की अवधि समाप्त

मंंत्रालय ने बताया है दोनों देश के नेता जल्द से जल्द अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देना चाहते हैं, लेकिन बैठक का नतीजा क्या निकला, इसकी जानकारी नहीं दी। बता दें कि 24 जुलाई को अमेरिका की ओर से लगाया गया अस्थायी 10 प्रतिशत टैरिफ की अवधि समाप्त हो रही है। इससे पहले दोनों देशों को किसी नतीजे पर निकलना है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की समझौते पर बातचीत के लिए भविष्य की वाशिंगटन यात्रा की भी जानकारी नहीं आई है।

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अड़चन

कहां आ रही है अड़चन?

अमेरिका-भारत के बीच हुए अंतरिम समझौते में अधिकतर मुद्दे सुलझ गए है। अभी सिर्फ अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं के लिए एक वैध टैरिफ निर्धारण का मुद्दा लंबित है। दरअसल, 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भारत सहित सभी देशों से पर लगे टैरिफ को अमान्य घोषित कर दिया था। इसके बाद, दोनों साझेदार एक वैध टैरिफ ढांचे पर पुनर्विचार कर रहे हैं। भारत ऐसा ढांचा चाहता है, जिसमें उसे चीन समेत अपने अन्य प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त हासिल हो।

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