गुजरात में शुरू हुई भारत की पहली LNG संचालित ट्रेन, अमित शाह दिखाई हरी झंडी
क्या है खबर?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन से भारत की पहली द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। यह कदम रेल परिवहन को पर्यावरण के अनुकूल और अधिक किफायती बनाने के भारत सरकार के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है। इस नई ट्रेन तकनीक से ईंधन की लागत में कमी आने के साथ-साथ कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जन में गिरावट आएगी।
जानकारी
सरकार ने 1,400 हॉर्सपावर वाली 2 ड्राइविंग पावर कारों को बदला
सरकार ने साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो में 1,400 हॉर्सपावर वाली 2 ड्राइविंग पावर कारों को दोहरे ईंधन सिस्टम में बदल दिया है। ये सिस्टम अब डीजल और LNG दोनों पर चलते हैं, जिससे LNG ने डीजल की खपत के 40 प्रतिशत कर दिया।
ट्विटर पोस्ट
यहां देखें वीडियो
A proud moment for Bharat! 🇮🇳 India’s first LNG-powered train, flagged off in Gujarat, marks another bold step towards a cleaner, smarter and more self-reliant railway network. With LNG capable of replacing nearly 40% of diesel consumption, this is not just a technological… pic.twitter.com/ujgfOGrRRk
— Zeennat Rana (@izeennatrana) September 27, 2026
जोर
शाह ने डीजल की खपत कम करने पर दिया जोर
शाह ने इस पहल के महत्व पर जोर देते हुए उल्लेख किया कि भारतीय रेलवे ने साल 2015-16 में 293 करोड़ लीटर डीजल की खपत की थी। यह संख्या 2024-25 में घटकर 108 करोड़ लीटर रह गई।
सरकार का लक्ष्य 2030 तक इसे शून्य पर लाना है, जिससे भारत की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
उन्होंने रेलवे नेटवर्क के तेजी से हो रहे विद्युतीकरण पर भी प्रकाश डाला, जिसके तहत 99.6 प्रतिशत नेटवर्क का पहले ही विद्युतीकरण हो चुका है।
सुरक्षा
कवच स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली की जाएगी स्थापित
नवीनतम बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के एक हिस्से के रूप में अहमदाबाद मंडल को स्वदेशी रूप से विकसित 'कवच' स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली भी मिलेगी।
इसे लगभग 411 करोड़ रुपये की लागत से 404 किलोमीटर के रेलवे नेटवर्क पर स्थापित किया जाएगा।
यह प्रणाली ट्रेनों की आपसी टक्कर को रोकने और ओवरस्पीडिंग से बचाकर रेलवे सुरक्षा को बढ़ाने के लिए डिजाइन की गई है, जिससे मानवीय भूल के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।