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भारत ने सिंधु जल संधि पर विश्व बैंक के फैसले को नकारा, जानिए क्या कहा
भारत ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था

भारत ने सिंधु जल संधि पर विश्व बैंक के फैसले को नकारा, जानिए क्या कहा

लेखन गजेंद्र
Aug 31, 2026
07:17 pm

क्या है खबर?

भारत ने विश्व बैंक की ओर से गठित मध्यस्थता न्यायालय (CoA) द्वारा सुनाए गए सिंधु जल संधि से संबंधित फैसले को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत ने कोर्ट को 'अवैध रूप से गठित' करार दिया और स्पष्ट किया कि जल बंटवारे समझौते को स्थगित रखने का उसका निर्णय लागू रहेगा। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि CoA को भारत के संप्रभु निर्णयों पर फैसला सुनाने का कोई अधिकार नहीं है।

फैसला

भारत ने क्या कहा?

मंत्रालय ने सोमवार को जारी बयान में कहा, " अवैध रूप से गठित तथाकथित CoA ने अंतरिम उपायों और सिंधु जल संधि की स्थिति से संबंधित एक निर्णय जारी किया है। इस तथाकथित न्यायालय का गठन विश्व बैंक द्वारा संधि की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए किया गया था और भारत इसके फैसले को स्पष्ट रूप से खारिज करता है, ठीक उसी तरह जैसे उसने निकाय द्वारा दिए गए सभी पूर्व निर्णयों को दृढ़ता से खारिज कर दिया है।"

बयान

भारत ने CoA को कभी मान्यता नहीं दी- मंत्रालय

मंत्रालय ने आगे कहा, "भारत ने इस CoA के अस्तित्व को कभी कानूनी मान्यता नहीं दी और लगातार मध्यस्थता निकाय की स्थापना को सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन माना है। इसलिए, भारत कभी इस निकाय के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ और इसके पूर्व निर्णयों पर कोई संज्ञान लेने से इनकार करता रहा है।"

मंत्रालय ने कहा कि कोर्ट का भारत के संप्रभु निर्णयों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है और इसके निर्णय भारत की कार्रवाई पर असर नहीं डालेगा।

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फैसला

CoA ने क्या फैसला दिया था?

CoA ने कहा था कि कोई भी आधार सिंधु जल संधि के निलंबन या समाप्ति को उचित नहीं ठहरा सकता है और भारत को समझौते के तहत अपने दायित्वों का पालन करना चाहिए।

साथ ही, कोर्ट ने भारत को RHEP बांध की दीवार और बिजली ग्रहण संरचना को कुछ निश्चित स्तरों से ऊपर कंक्रीट करने से जुलाई 2027 तक प्रतिबंधित किया है।

कोर्ट ने कहा है कि सिंधु जल संधि पूरी तरह से लागू रहेगी।

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