युद्धपोत IRIS लावन के साथ कोच्चि में फंसे 183 ईरानी नाविकों को वापस स्वदेश भेजेगा भारत
क्या है खबर?
अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से कोच्चि में फंसे ईरानी नौसैनिक युद्धपोत IRIS लावन के 183 नाविकों को भारत वापस उनके स्वदेश भेजने को तैयार है। IRIS लावन ने ईरानी युद्धपोत IRIS डेना और IRIS बुशहर के साथ फरवरी में विशाखापत्तनम में आयोजित भारत के अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा और मिलान 2026 अभ्यासों में भाग लिया था। सभी ईरानी नाविक 4 मार्च से कोच्चि में प्रवास पर हैं। वे भारतीय नौसैनिक सुविधाओं में ठहरे हुए हैं।
फैसला
कोच्चि में क्यों फंसा है IRIS लावन?
विशाखापट्टनम में संयुक्त अभ्यास के बाद तीनों ईरानी युद्धपोत अपने देश वापस लौट रही थी। तभी हिंद महासागर में संचालन के दौरान IRIS लावन में खराबी आ गई। इसके बाद ईरान ने 28 फरवरी को भारत सरकार से अपने तीनों युद्धपोत का लंगर भारतीय बंदरगाह में गिराने की अनुमति मांगी थी। सरकार ने 1 मार्च को मंजूरी दी। इस बीच, अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया। तीनों युद्धपोत में केवल IRIS लावन 4 मार्च को कोच्चि में पहुंचा
बंदरगाह
4 मार्च को अमेरिका ने IRIS डेना को डुबोया
उसी दिन अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका तट से दूर IRIS डेना पर 2 टॉरपीडो दागे, जिसमें एक युद्धपोत पर लगा और डूब गया। हमले में 80 नाविकों की मौत हुई, जबकि 34 को श्रीलंकाई नौसैनिकों ने बचाया। श्रीलंका ने IRIS बुशहर को अपने बंदरगाह पर खड़ा किया और नाविको को आश्रय दिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद को बताया था कि IRIS लावन को कोच्चि में खड़ा करना सही कदम था और ईरान ने इसके लिए आभार जताया था।