Loading...
स्वतंत्रता दिवस: 5 रियासतों ने विलय से किया था इनकार, जानिए फिर कैसे बना वर्तमान भारत?
देश की आजादी के समय 5 रियासतों ने भारत में विलय से इनकार कर दिया था (तस्वीर: फाइल)

स्वतंत्रता दिवस: 5 रियासतों ने विलय से किया था इनकार, जानिए फिर कैसे बना वर्तमान भारत?

Aug 15, 2026
01:11 pm

क्या है खबर?

15 अगस्त, 1947 देश को आजादी के समय भारत का भौगोलिक आकार वैसा नहीं था जैसा आज दिखता है। अंग्रेजों ने 500 से अधिक रियासतों को भारत और पाकिस्तान में शामिल होने या स्वतंत्र रहने की छूट दी थी। हालांकि, सरदार वल्लभभाई पटेल और वीपी मेनन ने अपनी सूझबूझ से अधिकांश राजाओं को मना लिया, लेकिन 5 बड़ी रियासतें भारत में विलय से इनकार करती रही। आइए जानते हैं वो रियासतें कौनसी थी और वह भारत में कैसे शामिल हुई।

#1

पाकिस्तान में शामिल होना चाहते थे जूनागढ़ के नवाब

सौराष्ट्र की जूनागढ़ रियासत चारों तरफ से भारतीय सीमाओं से घिरी हुई थी और उसकी बहुसंख्यक आबादी हिंदू थी।

इसके बावजूद नवाब महाबत खान रसूल खान ने 15 अगस्त, 1947 को पाकिस्तान में शामिल होने के विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए।

इसके बाद 13 सितंबर, 1947 को पाकिस्तान ने जूनागढ़ के विलय को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया।

नवाब के इस फैसले के खिलाफ 'आरजी हुकूमत' यानि अस्थायी सरकार के तहत जनविद्रोह शुरू हो गया।

हालात

तिजोरी और प्रिय पालतू कुत्तों को लेकर कराची भागे नवाब

जूनागढ़ में विद्रोह बढ़ने के बाद नवाब अपनी तिजोरी और पालतू कुत्तों को लेकर विमान से कराची भाग गए। इसके बाद 9 नवंबर, 1947 को भारतीय सेना ने जूनागढ़ का प्रशासन संभाला।

इसके बाद रियासत में 20 फरवरी 1948 को बड़ा जनमत संग्रह आयोजित किया गया, जिसके परिणाम चौंकाने वाले रहे।

1.90 लाख से अधिक मतदाताओं में से केवल 91 लोगों ने पाकिस्तान के पक्ष में वोट दिया और जूनागढ़ पूर्ण रूप से भारत का हिस्सा बन गया।

ADVERTISEMENT

#2

हैदराबाद के लिए चलाया गया था 'ऑपरेशन पोलो'

आजादी के समय हैदराबाद सबसे बड़ी और अमीर रियासतों में से एक थी। निजाम मीर उस्मान अली खान ने भारत में शामिल होने से इनकार कर दिया।

उन्होंने 29 नवंबर, 1947 को भारत सरकार के साथ एक साल का 'यथास्थिति समझौता' किया, लेकिन इसकी आड़ में वह स्वतंत्र देश की तैयारियां करते रहे।

उन्होंने पाकिस्तान को 15 करोड़ रुपये का गुप्त कर्ज देकर यूरोप और पाकिस्तान के जरिए अवैध रूप से हथियारों की तस्करी करना शुरू कर दिया।

ADVERTISEMENT

कार्रवाई

भारतीय सेना की कार्रवाई से हैदराबाद की सेना ने टेके घुटने

निजाम की मंशा भारत के सीने में एक 'स्वतंत्र इस्लामिक राज्य' बनाने की थी। उन्होंने कासिम रिजवी के नेतृत्व वाली निजी उग्रवादी सेना 'रजाकारों' को खुली छूट दे दी।

उन्होंने लोगों पर अत्याचार शुरू किए, जिससे अस्थिरता फैल गई। उसके बाद सरदार पटेल ने सख्त फैसला लिया।

13 सितंबर, 1948 को भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन पोलो' शुरू किया। 17 सितंबर, 1948 को निजाम ने आत्मसमर्पण किया और हैदराबाद का भारत संघ में विलय हो गया।

#3

त्रावणकोर रियासत ने आजादी के बाद की बगावत

दक्षिण भारत की समृद्ध रियासत त्रावणकोर के दीवान सर सीपी रामास्वामी अय्यर ने आजादी से पहले ही स्वतंत्र रहने का ऐलान कर दिया था।

उनका मानना था कि वो यूरेनियम और समृद्ध समुद्री तटों के साथ आसानी से अपना विकास कर लेंगे।

उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना के साथ गोपनीय बातचीत भी शुरू कर दी और ब्रिटेन से व्यापार की योजना बनाने लगे।

25 जुलाई, 1947 को केरल सोशलिस्ट पार्टी के कार्यकर्ता ने दीवान पर चाकू से हमला कर दिया था।

निर्णय

महाराजा ने डर के चलते लिया भारत में विलय होने का निर्णय

इस हमले में गंभीर रूप से घायल होने और स्थानीय जनता के आक्रोश को देखकर महाराजा बेहद डर गए।

इसके बाद 30 जुलाई, 1947 को महाराजा श्रीचितिरा थिरुनल बलराम वर्मा ने वीपी मेनन को तार भेजकर भारत में विलय की सहमति दे दी।

इसके बाद भी पूर्ण प्रशासनिक एकीकरण अटका रहा। बाद में 1 जुलाई, 1949 को जाकर त्रावणकोर और कोचीन को मिलाकर 'तिरु-कोच्चि' राज्य बनाया गया, तब जाकर इसका प्रशासनिक एकीकरण पूरा हुआ।

#4

भोपाल के नवाब के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता

भोपाल के नवाब हमीदुल्लाह खान, जिन्ना के करीबी मित्र थे और ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के कट्टर समर्थक थे।

उनकी महत्वाकांक्षा भोपाल को भारत के बीचों-बीच एक 'तीसरा प्रभुत्व' बनाने की थी। उनके अड़ियल रवैये के खिलाफ जनवरी 1949 में 'भोपाल विलीनीकरण आंदोलन' शुरू हो गया।

आखिर में नवाब ने हार मान ली और 30 अप्रैल, 1949 को विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। 1 जून, 1949 को भोपाल का आधिकारिक रूप से भारत में विलय हो गया।

#5

जम्मू-कश्मीर ने महाराजा ने किया था स्वतंत्र रहने का ऐलान

जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने स्वतंत्र रहते हुए कश्मीर को 'पूर्व का स्विट्जरलैंड' बनाने की इच्छा जताई थी।

22 अक्टूबर, 1947 को पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन गुलमर्ग' के तहत कबाइलियों और अपनी सेना की भेष बदलकर घुसपैठ कराई और कश्मीर पर आक्रमण कर दिया।

इस पर असहाय महाराजा ने भारत से सैन्य सहायता मांगी। तत्कालीन गृह सचिव मेनन ने बिना विलय पत्र के अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत भारतीय सेना को वहां भेजने से इनका कर दिया।

विलय

भारतीय सेना की मदद के लिए महाराजा ने किए विलय पत्र पर हस्ताक्षर

जम्मू-कश्मीर के महाराजा ने 26 अक्टूबर, 1947 को विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए, जिसे गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने 27 अक्टूबर को मंजूरी दे दी।

इसके ठीक बाद 27 अक्टूबर, 1947 की तड़के सिख रेजिमेंट के जांबाज सैनिकों को डगलस C-47 विमानों से श्रीनगर एयरबेस उतारा गया और भारतीय सेना ने पाकिस्तानी हमलावरों को खदेड़ना शुरू किया।

जिसके बाद ही कश्मीर का भारत में विलय संभव हो सका। हालांकि, कश्मीर पर आज भी पाकिस्तान की निगाहें हैं।

ADVERTISEMENT