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I-PAC मामला: सुप्रीम कोर्ट की ममता बनर्जी को फटकार, कहा- मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप अच्छी स्थिति नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को फटकार लगाई है

I-PAC मामला: सुप्रीम कोर्ट की ममता बनर्जी को फटकार, कहा- मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप अच्छी स्थिति नहीं

Mar 18, 2026
06:28 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में I-PAC के कार्यालय और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी में हस्तक्षेप किए जाने को लेकर बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि छापेमारी में मुख्यमंत्री बनर्जी की उपस्थिति अच्छी स्थिति नहीं है और ऐसी असामान्य घटनाओं में केंद्रीय एजेंसी को बिना किसी उपाय के नहीं छोड़ा जा सकता है। आइए पूरी खबर पर नजर डालते हैं।

फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने बनर्जी को लेकर की अहम टिप्पणी

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और एनवी अंजारी की पीठ ने ED की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, "ED की छापेमारी में मुख्यमंत्री बनर्जी की उपस्थिति अच्छी स्थिति नहीं है। एक मुख्यमंत्री सरकारी कार्यालय में घुसता है और केंद्रीय एजेंसी के काम में दखल देता है। ऐसे में उपाय क्या है? अगर कोई दूसरा मुख्यमंत्री फिर से ऐसा करता है तो क्या होगा? हमें एक ऐसी स्वाभाविक स्थिति का सामना करना होगा जिसका कोई न कोई उपाय होना चाहिए।"

याचिका

ED ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दायर की थी याचिका?

सुप्रीम कोर्ट ED की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें आरोप लगाया गया था कि मुख्यमंत्री बनर्जी और सरकार ने 8 जनवरी को कोलकाता स्थित राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC के कार्यालय और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर हुई छापेमारी में हस्तक्षेप किया था। ED का आरोप है कि छापेमारी के दौरान बनर्जी वहां पहुंचकर लैपटॉप, फोन और कई दस्तावेज लेकर बाहर निकल गई थीं। यह पूरी तरह से सत्ता के घोर दुरुपयोग का मामला है।

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सफाई

पश्चिम बंगाल सरकार ने क्या दी सफाई?

सुनवाई में राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार के किसी विभाग को राज्य सरकार के खिलाफ याचिका दायर करने की अनुमति देना संघीय ढांचे के लिए खतरनाक होगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, राजस्व खुफिया निदेशालय और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय जैसी जांच एजेंसियों को राज्य सरकार पर मुकदमा करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में ऐसा आदेश देना अनुचित होगा।

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सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने किए अहम सवाल

जस्टिस मिश्रा ने सवाल किया कि किसी मुख्यमंत्री के किसी केंद्रीय एजेंसी के काम में बाधा डालने की असामान्य परिस्थिति उत्पन्न होने पर क्या होगा? उन्होंने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री ने केंद्र नियंत्रित सरकारी कार्यालय में जबरदस्ती प्रवेश किया। अगर अनुच्छेद 226 भी मान्य नहीं है, तो अनुच्छेद 32 भी मान्य नहीं है, तो फिर कौन फैसला करेगा? किसी दिन कोई और मुख्यमंत्री किसी और कार्यालय में प्रवेश कर सकता है। ऐसे में कोई शून्य नहीं होना चाहिए।

छापेमारी

ED ने I-PAC कार्यालय पर क्यों मारा था छापा?

ये मामला ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्र से अवैध तरीके से कोयले की खुदाई और चोरी से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि अनुप माजी इसका मास्टर माइंड था, जिसने ECL क्षेत्र से 2,742 करोड़ रुपये का कोयला अवैध रूप से निकाला। इसके बाद साल 2020 में इस मामले में CBI ने मामला दर्ज किया था। ED का कहना है कि अवैध आय को हवाला के जरिए इधर-उधर किया गया और करोड़ों की राशि I-PAC को मिली।

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