मध्य प्रदेश में इंसान-जानवर संघर्ष का डरावना सच: 50 मौतें, 45 बाघ और 88 करोड़ का हर्जाना
मध्य प्रदेश के लिए यह साल मुश्किलों भरा रहा है। यहां इंसान-जानवर संघर्ष के चलते कम से कम 50 लोगों और 45 से ज्यादा बाघों को जान गंवानी पड़ी है। बाघों के ज्यादातर हमले महाकोशल और बांधवगढ़ इलाकों में देखने को मिले हैं, खासकर उस समय जब लोग जंगल से लकड़ी और घास-फूस बटोरने में लगे थे।
इसके अलावा, जंगली सूअर, हाथी, भालू और यहाँ तक कि तेंदुए से भी स्थानीय लोगों का आमना-सामना होता रहता है, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
मुआवजे का भुगतान 88.38 करोड़ रुपये
भारत में बाघों की सबसे बड़ी आबादी मध्य प्रदेश में है, जो करीब 1000 की संख्या में है। लेकिन, बाघों के लिए जंगल का दायरा उस हिसाब से नहीं बढ़ पाया है। नए गांव, खेत, हाईवे, रेलवे लाइन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर वन्यजीवों के रास्तों को काट रहे हैं।
नतीजतन, इंसान और वन्यजीवों का आमना-सामना लगातार बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने 2020-21 से 2024-25 के बीच इन नुकसानों के लिए 88.38 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया है। यह दिखाता है कि अब प्रकृति और इंसान के बीच संतुलन बनाना कितना जरूरी हो गया है।