नदी संजीवनी योजना में बिहार की नदियों से निकलने वाली गाद से कैसे तैयार होंगे हाईवे?
क्या है खबर?
बिहार में हर साल तबाही मचाने वाली बाढ़ और नदियों में जमा होने वाली भारी गाद (सिल्ट) की समस्या को अब विकास के अवसर में बदल दिया गया है। बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके तहत बिहार की नदियों से निकलने वाली गाद का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में किया जाएगा। आइए जानते हैं नदियों की गाद से हाईवे कैसे बनेंगे।
घोषणा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की घोषणा
इस ऐतिहासिक MoU की घोषणा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को एक्स पर की है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'नदियों का पुनर्जीवन, बिहार का नव निर्माण! नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में बिहार सरकार और MoRTH के बीच MoU पर हस्ताक्षर हुए। 'नदी संजीवनी' पहल से नदियों की गाद निकालकर उनकी जलधारण क्षमता बढ़ेगी और निकाली गई गाद का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में किया जाएगा।'
ट्विटर पोस्ट
यहां देखें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पोस्ट
नदियों का पुनर्जीवन,
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) November 3, 2026
बिहार का नव निर्माण!
नई दिल्ली में माननीय केंद्रीय मंत्री श्री @nitin_gadkari जी की गरिमामयी उपस्थिति में बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बीच MoU पर हस्ताक्षर हुए।
"नदी संजीवनी" पहल से नदियों की गाद निकालकर उनकी जलधारण क्षमता… pic.twitter.com/9MLkAr4coi
मॉडल
गडकरी ने पहल को पूरे देश के लिए बताया मॉडल
केंद्रीय मंत्री गडकरी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे देश के लिए अनुकरणीय मॉडल करार दिया है।
बता दें कि नदियों में गाद का जमाव बिहार में जलप्रवाह की सबसे बड़ी रुकावटों में से एक है। इसी संकट को संसाधन में बदलने के लिए बिहार सरकार और केंद्र के बीच साझा सहमति बनी है।
इसके बाद बिहार सरकार ने गत 17 सितंबर गाद प्रबंधन नीति लागू कर दी। वह यह कदम उठाने वाला देश का पहला राज्य है।
लाभ
इस समझौते से क्या लाभ होगा?
तकनीकी दृष्टिकोण से इस नीति का सबसे बड़ा लाभ दोतरफा है।
इसके तहत जहां सड़क निर्माण के लिए उपजाऊ खेतों से मिट्टी निकालने की निर्भरता घटेगी और कृषि भूमि का कटाव रुकेगा, वहीं नदियों के संकरे हिस्सों, संगमों और बराजों के पास जमा तलछट हटने से स्थानीय जलप्रवाह बेहतर हो सकेगा।
बता दें कि नेपाल की 7 नदियां बिहार में हर साल तबाही मचाती है। इससे राज्य को हर साल 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होता है।
सवाल
नदियों गाद से कैसे बनेंगे हाईवे?
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन मंत्रालय इस पूरी परियोजना को आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से अंजाम देंगे।
इसके तहत NHAI की ओर से आधुनिक मशीनों की मदद से गंगा सहित बिहार की अन्य प्रमुख नदियों और जल निकायों से गाद को बाहर निकाला जाएगा।
इसके बाद गाद की गुणवत्ता की जांच की जाएगी। सड़क निर्माण के अनुकूल और उपयुक्त पाई गई गाद को निर्माण स्थलों तक पहुंचाया जाएगा।
काम
हाईवे निर्माण में किस काम आएगी यह गाद?
इस गाद का मुख्य उपयोग हाईवे के ऊंचे एम्बैंकमेंट (बांध/तटबंध) बनाने, गड्ढों को भरने और सड़क की मजबूत आधारशिला (नींव) तैयार करने में किया जाएगा।
यह परियोजनों बुलढाणा मॉडल पर आधारित है, जहां स्थानीय जल निकायों के कचरे और गाद से सड़कें बनाई गई थीं।
बता दें कि हाईवे बनाने के लिए परिवहन मंत्रालय को जमीन की ऊपरी उपजाऊ मिट्टी को खरीदना पड़ता है। नदियों की गाद मिलने से हाईवे निर्माण की लागत में काफी कमी आएगी।
इस्तेमाल
बिहार में NHAI की 16 परियोजनाओं में होगा गाद का इस्तेमाल
वर्तमान में बिहार में NHAI की 1,561 किलोमीटर की 39 परियोजनाएं चल रही हैं, जिनकी लागत 58,340 करोड़ रुपये है।
इसी तरह 11 नई परियोजनाओं में 1.85 लाख करोड़ की लागत से 1,982 किलोमीटर सड़क बनेंगी।
इस MoU के जरिए नदियों से कुल 2.43 करोड़ क्यूबिक मीटर मुफ्त गाद का इस्तेमाल अगली 16 चालू परियोजनाओं में किया जाएगा।
इसी तरह भविष्य में कुल 27 परियोजनाओं में 8.3 करोड़ क्यूबिक मीटर गाद के इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है।
नदी
पहले चरण में इन नदियों से निकाली जाएगी गाद
केंद्रीय जल आयोग (CWC) और बिहार जल संसाधन विभाग के सर्वेक्षण के आधार पर पहले चरण में उन नदियों को चुना गया है जिनमें गाद जमा होने से बाढ़ का खतरा सर्वाधिक रहता है।
इनमें गंगा नदी से बक्सर से भागलपुर और कहलगांव तक के हिस्सों, कोसी नदी, उत्तर बिहार के चंपारण और मुजफ्फरपुर के इलाकों में जलप्रवाह को सुचारू करने के लिए गंडक और बूढ़ी गंडक और दक्षिण बिहार के लिए सोन और पुनपुन नदी से गाद निकाली जाएगी।