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भारत-ब्रिटेन सामाजिक सुरक्षा समझौते से 75,000 भारतीय कामगारों को क्या लाभ होगा?
भारत-ब्रिटेन सामाजिक सुरक्षा समझौते से हजारों भारतीय कामगारों को होगा फायदा (तस्वीर: फाइल)

भारत-ब्रिटेन सामाजिक सुरक्षा समझौते से 75,000 भारतीय कामगारों को क्या लाभ होगा?

Jul 15, 2026
07:54 pm

क्या है खबर?

भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुआ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) बुधवार (15 जुलाई) से लागू हो गया। इसे आधिकारिक तौर पर व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) कहा जाता है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच पिछले जुलाई में हुए दोहरे अंशदान सम्मेलन (DDC) समझौते भी लागू हुए हैं। इसके तहत ब्रिटेन ने भारतीय कामगारों और उनके नियोक्ताओं को 5 साल के लिए सामाजिक सुरक्षा अंशदान से छूट दी है। आइए इसके बारे में जानते हैं।

सवाल

DCC या सामाजिक सुरक्षा समझौता क्या है?

ब्रिटिश सरकार की वेबसाइट के अनुसार, DCC एक प्रकार का सामाजिक सुरक्षा समझौता (SSA) है जो सामाजिक सुरक्षा अंशदान का समन्वय करता है।

DCC का एक प्रावधान कर्मचारियों (डिटैच्ड वर्कर्स) को एक सहमत अधिकतम अवधि के लिए अस्थायी रूप से विदेश में काम करते समय केवल अपनी घरेलू सामाजिक सुरक्षा योजना में भुगतान जारी रखने की अनुमति देता है।

इस तरह के समझौते व्यवसायों और कर्मचारियों को सुरक्षा प्रदान करते हैं और उन्हें लागत बचाने में मदद करते हैं।

जानकारी

भारत के इन देशों के साथ भी हैं ऐसे समझौते

भारत के बेल्जियम, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, फ्रांस, डेनमार्क, दक्षिण कोरिया और नीदरलैंड जैसे देशों के साथ भी ऐसे समझौते हैं। इस प्रकार रोजगार के लिए विदेश जाने वाले भारतीयों को इन देशों की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में योगदान की आवश्यकता नहीं है।

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सहमति

भारत और ब्रिटेन किन बातों पर सहमत हुए हैं?

समझौते के अनुसार, ब्रिटेन में अस्थायी रूप से काम कर रहे भारतीय कामगारों को अनिवार्य रूप से 5 साल की अवधि के लिए ब्रिटेन की सामाजिक सुरक्षा में योगदान से छूट मिलेगी।

दरअसल, भारत-ब्रिटेन FTA पर बातचीत के दौरान भारत की यह एक प्रमुख मांग थी, ताकि अल्पकालिक आधार पर कुशल भारतीय पेशेवरों को लाने से जुड़े अतिरिक्त लागत बोझ को कम किया जा सके।

भारत में काम करने वाले ब्रिटिश श्रमिकों पर भी यही सिद्धांत लागू होता है।

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फायदा

ब्रिटेन के कामगारों को क्या होगा फायदा?

वर्तमान में ब्रिटिश नागरिक भारत में कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) योजना के तहत 'अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक' की श्रेणी में आते हैं, जिसके अनुसार नियोक्ताओं को सकल वेतन का 24 प्रतिशत योगदान देना अनिवार्य है।

हालांकि, 58 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भारत छोड़ने पर व्यक्ति अपने योगदान की पूरी राशि ब्याज सहित वापस प्राप्त कर सकते हैं।

DDC के तहत भारत में अस्थायी रूप से काम करने वाले ब्रिटिश नागरिकों को EPF योगदान से छूट दी जाएगी।

लाभ

इस समझौते से भारतीयों को क्या होगा लाभ?

FTA के लागू होने के साथ ही DDC भी प्रभावी हो गया है। इससे 75,000 से अधिक भारतीय कामगारों और 900 से अधिक नियोक्ताओं को लाभ की उम्मीद है।

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, इससे हर साल 60 करोड़ डॉलर (लगभग 5,700 करोड़ रुपये) की बचत होगी।

वर्तमान में ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय कर्मचारी और उनके नियोक्ता वेतन का 23 प्रतिशत हिस्सा राष्ट्रीय बीमा प्रणाली में योगदान करते हैं। इसके बाद भी अस्थायी कर्मचारी संबंधित लाभों के पात्र नहीं होते हैं।

बयान

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने क्या दिया बयान?

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, "यह ब्रिटेन में काम करने वाले उन युवा पुरुषों और महिलाओं को राहत देगा, जो 2-5 साल के लिए काम करने जाते हैं। पहले उनके वेतन का 25 प्रतिशत हिस्सा बेकार चला जाता था। स्थानीय सरकार उसे ले लेती थी और कामगार को उससे कोई लाभ नहीं मिलता था। अब हमने एक DDC को अंतिम रूप दे दिया है जो 15 तारीख से लागू हो जाएगा। इससे उन्हें अब यह पैसा नहीं देना होगा।"

फायदा

भारतीय कामगारों को क्या होगा फायदा?

गोयल ने कहा, "सेवा क्षेत्र या अन्य नौकरियों में 5 साल तक काम करने के लिए ब्रिटेन जाने वाले भारतीयों के वेतन का 25 प्रतिशत हिस्सा, जो पहले स्थानीय सरकार द्वारा लिया जाता था, अब भारत में उनके भविष्य निधि खातों में जमा किया जाएगा। वह पैसा उन्हीं का होगा।"

उन्होंने कहा, "इसी तरह भारत में काम करने वाले ब्रिटिश नागरिकों से लिया जाना वाला 24 प्रतिशत हिस्सा ब्रिटेन के राष्ट्रीय बीमा अंशदान में जमा होगा, जो उनका होगा।"

स्पष्टता

केवल अस्थायी कर्मचारियों पर लागू होगा यह समझौता

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि DDC से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और इंफोसिस जैसी IT क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों को बड़ा फायदा होगा।

हालांकि, यह लाभ केवल अस्थायी कर्मचारियों पर लागू होता है, यानी वे कर्मचारी जो पहले से ही भारत स्थित नियोक्ता के लिए काम कर रहे हैं और जिन्हें 60 महीने तक के लिए अस्थायी रूप से ब्रिटेन भेजा जाता है।

यह उन भारतीयों पर लागू नहीं होता जो ब्रिटेन में जाकर स्थानीय रोजगार प्राप्त करते हैं।

प्रभाव

इस समझौते का पूरा प्रभाव क्या होगा?

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा है कि यह समझौता भारत के सेवा क्षेत्र और कुशल कार्यबल के लिए एक परिवर्तनकारी कदम साबित होगा। इसके अतिरिक्त यह समझौता अस्थायी विदेशी असाइनमेंट पर तैनात कर्मचारियों की गतिशीलता और निरंतर सामाजिक सुरक्षा कवरेज को सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने कहा कि इस समझौते के बाद सेवा क्षेत्र में भारत-ब्रिटेन की साझेदारी मजबूत होगी और दोनों देशों के उच्च कौशल और नवाचार करने वाले सेवा क्षेत्रों का लाभ उठाया जा सकेगा।

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