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तमिलनाडु के कलपक्कम में ऐसा क्या हुआ, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने बताया बड़ी परमाणु उपलब्धि?
तमिलनाडु के कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने क्रिटिकैलिटी हासिल की है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

तमिलनाडु के कलपक्कम में ऐसा क्या हुआ, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने बताया बड़ी परमाणु उपलब्धि?

लेखन गजेंद्र
Apr 07, 2026
01:34 pm

क्या है खबर?

तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में स्थित कलपक्कम में भारत को असैन्य परमाणु ऊर्जा की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। यहां स्वदेशी रूप से विकसित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है, जिससे सुरक्षित और नियंत्रित तरीके से ऊर्जा पैदा करने का मार्ग सफल हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसको लेकर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है। क्या है यह बड़ी उपलब्धि? आइए, समझते हैं।

संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में क्या लिखा?

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा, 'आज, भारत अपनी असैन्य परमाणु सफर में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है और अपने परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण को आगे बढ़ाया है। कल्पक्कम में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है।अपनी खपत से अधिक ईंधन उत्पन्न करने में सक्षम उन्नत रिएक्टर हमारी वैज्ञानिक क्षमता और इंजीनियरिंग दक्षता को दर्शाता है। यह तीसरे चरण में विशाल थोरियम भंडारों का उपयोग करने में निर्णायक कदम है।'

कार्यक्रम

प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्या है?

PFBR भारत का पहला स्वदेशी फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है, जिसकी क्षमता 500 मेगावाट बिजली बनाने की है। इसने क्रिटिकलिटी हासिल की है, यानी रिएक्टर के अंदर न्यूक्लियर चेन रिएक्शन शुरू हुआ और खुद से चलने लगा है। इससे ऊर्जा बनाने की प्रक्रिया पूरी हुई है। हालांकि, अभी ऊर्जा बनी नहीं है। सामान्य न्यूक्लियर रिएक्टर में यूरेनियम जलने से ऊर्जा बनती है, लेकिन ईंधन खत्म होता है। इसमें ईंधन जलेगा, लेकिन उससे ज्यादा ईंधन पैदा होगा। इसलिए इसे 'ब्रीडर' कहते हैं।

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चरण

तीन चरणों का है कार्यक्रम

परमाणु कार्यक्रम को 3 चरणों में बांटा गया है, जिसमें पहला चरण प्रेशरयुक्त भारी जल रिएक्टर (PHWR) है, जो कोरापुट, राजस्थान में चल रहा है और यूरेनियम से बिजली बनाता है। दूसरा चरण फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है, जो अभी शुरू हुआ है। ये प्लूटोनियम और यूरेनियम से बिजली बनाता है और अतिरिक्त प्लूटोनियम पैदा करता है। तीसरा चरण थोरियम आधारित रिएक्टर है, जिसमें थोरियम को यूरेनियम-233 में बदलकर बिजली बनाई जाएगी। दूसरे चरण की सफलता से तीसरा चरण आसान होगा।

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उपलब्धि

भारत के लिए बड़ी उपलब्धि क्यों?

यह रिएक्टर वर्ष 2004 में शुरू हुआ था, लेकिन कई तकनीकी चुनौतियों के कारण क्रिटिकलिटी नहीं हो रहा था, जो लगातार प्रयास से अब सफल हुआ है। इसकी सफलता से भारत रूस के बाद दुनिया का दूसरा देश बन गया है, जिसके पास व्यावसायिक स्तर का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है। यह अभी अमेरिका, फ्रांस, चीन के पास भी नहीं है। तीसरा चरण पूरा होने पर भारत यूरेनियम आयात पर निर्भरता लगभग खत्म कर देगा। यह पूरी तरह स्वदेशी है।

कार्यक्रम

यह कार्यक्रम कहलाता है 'भाभा विजन'

भारत में 3 चरण के परमाणु कार्यक्रम को देश में परमाणु कार्यक्रम के जनक 'डॉ होमी जहांगीर भाभा का विजन' या 'भाभा विजन' भी कहा जाता है। भारत में दुनिया के मुकाबले यूरेनियम बहुत कम (1-2 प्रतिशत), लेकिन थोरियम का भंडार (25 प्रतिशत) है। इसलिए उन्होंने 1950 के दशक में देश में थोरियम का इस्तेमाल कर सस्ती और साफ ऊर्जा देने का कार्यक्रम शुरू किया था। थोरियम मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु आदि समुद्री तटों पर मिलता है।

ट्विटर पोस्ट

वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री मोदी ने किया था कलपक्कम का दौरा

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