Loading...
#NewsBytesExplainer: कैसे मचती है भगदड़, इन घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है?
कोलकाता में भगदड़ मचने से 19 लोगों की मौत

#NewsBytesExplainer: कैसे मचती है भगदड़, इन घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है?

लेखन आबिद खान
Oct 18, 2026
12:25 pm

क्या है खबर?

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा पांडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 25 लोग घायल हुए हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर है। ये घटना चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई। बताया जा रहा है कि सप्ताहांत होने की वजह से भीड़ ज्यादा थी। ऊपर से बारिश ने व्यवस्थाएं बिगाड़ दीं। आइए समझते हैं भगदड़ की घटनाओं को कैसे रोका जा सकता है।

भगदड़

सबसे पहले भगदड़ को समझिए

भगदड़ एक ऐसी स्थिति है, जहां लोगों की भीड़ इतनी ज्यादा हो जाती है कि कोई शख्स अपनी गतिविधियों पर से नियंत्रण खो देता है। समझने के लिए भगदड़ को अगर 'भीड़ का दबाव' कहें तो भी गलत नहीं होगा।

आमतौर पर भगदड़ कई वजहों से मच सकती है। जैसे जब लोगों की संख्या ज्यादा हो जाए, किसी जगह पर सुरक्षित क्षमता से ज्यादा लोगों को आने दिया जाए या आने-जाने के रास्ते बहुत संकरे हों।

वजह

किन वजहों से मच सकती है भगदड़?

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के मुताबिक, अपर्याप्त इंतजामों की वजह से घबराहट या बहुत ज्यादा उत्साह पैदा हो सकता है, जिससे भीड़ जमा हो सकती है या लोगों की आवाजाही अचानक तेज हो सकती है।

जब भीड़ बहुत ज्यादा घनी हो जाती है, तो एक छोटी सी घटना जैसे किसी का गिर जाना, बैरिकेड का टूट जाना, अचानक बारिश शुरू हो जाना या लोगों का अपनी दिशा बदल लेना भी बहुत गंभीर नतीजे ला सकती है।

ADVERTISEMENT

व्यवहार

आयोजनों में भीड़ का व्यवहार समझना क्यों जरूरी है?

NDMA के अनुसार, सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ के व्यवहार को समझना जरूरी है।

NDMA ने बताया कि भीड़ में किसी व्यक्ति का व्यवहार दूसरों के व्यवहार से प्रभावित होता है। जैसे कुछ लोगों द्वारा बैरिकेड कूदना या बाहर निकलने का वैकल्पिक रास्ता ढूंढना दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

उदाहरण के लिए, देर तक लाइन में लगा एक शख्स बैरिकड कूदकर जल्दी पहुंचने की कोशिश करता है जिसे देख दूसरे भी ऐसा करने लगते हैं।

ADVERTISEMENT

भीड़ प्रबंधन

कैसे किया जा सकता है भीड़ प्रबंधन?

NDMA का कहना है कि भीड़ प्रबंधन का मुख्य सिद्धांत मांग और क्षमता के प्रबंधन पर आधारित है। कितने लोग अंदर आ रहे हैं इसे नियंत्रित करना, उनकी आवाजाही को व्यवस्थित करना और बाहर निकलने की प्रक्रिया को प्रबंधित करना।

सबसे पहले भीड़ का अनुमान लगाना चाहिए। इसके बाद उन्हें आयोजन स्थल और उसके अलग-अलग हिस्सों की क्षमता का हिसाब लगाना चाहिए।

हो सकता है कि कोई मैदान बड़ा हो, लेकिन वहां जाने का रास्ता, पुल या सीढ़ियां संकरी हों।

धार्मिक आयोजन

धार्मिक आयोजनों के लिए क्या है NDMA की सलाह?

धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन मुश्किल हो सकता है, क्योंकि श्रद्धालु मुहूर्त या दर्शन के लिए एक साथ ज्यादा संख्या में आ सकते हैं।

NDMA का कहना है कि जिन आयोजनों में पंजीयन के जरिए भीड़ को नियंत्रित नहीं किया जा सकता, वहां 'होल्डिंग एरिया' बनाए जाना चाहिए। यहां लोगों को कुछ देर रोका जा सकता है।

इसके अलावा पैदल चलने वालों के लिए वन-वे रास्ते, अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार और भीड़ की रियल-टाइम निगरानी भी की जानी चाहिए।

बयान

अधिकारी बोले- बेकाबू होने से पहले ही शुरू हो भीड़ प्रबंधन

इंडियन एक्सप्रेस से NDMA के एक पूर्व अधिकारी ने कहा, "भीड़ प्रबंधन तब शुरू नहीं होना चाहिए, जब वह बेकाबू होने लगे। भीड़ प्रबंधन का असली मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भीड़ कभी भी इतनी अव्यवस्थित न हो कि एक छोटी घटना भी बड़ी आपदा का रूप ले ले।"

NDMA का कहना है कि पर्याप्त जगह, रोशनी, बैरिकेडिंग, पीने का पानी, चिकित्सा सुविधाएं, प्रशिक्षित स्वयंसेवक, स्पष्ट साइनबोर्ड और सार्वजनिक घोषणाओं के इंतजाम किए जाने चाहिए।

ADVERTISEMENT