'शिवालिक' और 'नंदा देवी' के आगमन से भारत की LPG संबंधी समस्याओं में कितनी राहत मिलेगी?
क्या है खबर?
अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बीच भारत में आई रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत के बीच करीब 92,700 मीट्रिक टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) से लदे 2 टैंकर युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गुजरात के मुंद्रा और वडीनार बंदरगाह पहुंच गए हैं। इससे भारत की तनावग्रस्त LPG आपूर्ति को एक महत्वपूर्ण राहत मिली है। इनमें एक टैंकर जहाज 'शिवालिक' सोमवार को पहुंचा था और 'नंदा देवी' मंगलवार सुबह पहुंचा। आइए जानते है इनके आने से कैसे राहत मिलेगी।
गैस
दोनों जहाजों में कितनी गैस मौजूद है?
जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश सिन्हा के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में स्थित फारस की खाड़ी में भारतीय ध्वज वाले 24 जहाज मौजूद हैं। इनमें से 2 जहाज (शिवालिक और नंदा देवी) 13 मार्च को वहां से रवाना हुए और उन्होंने 14 को होर्मुज जलडमरूमध्य को पार लिया। उन्होंने बताया कि 'शिवालिक' में 46,200 मीट्रिक टन और 'नंदा देवी' में 46,500 मीट्रिक टन LPG गैस है। इस तरह दोनों जहाजों में कुल 92,700 मीट्रिक टन LPG मौजूद है।
आपूर्ति
दोनों टैंकर जहाजों से भारत में कितनी हो सकती है आपूर्ति?
ये जहाज भारत की आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण वृद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो देशभर के घरों द्वारा उपयोग किए जाने वाले लगभग 65 लाख मानक 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडरों के बराबर है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गैस से भारत की LPG आपूर्ति में सीमित राहत मिलेगी। भारत में लगभग 33 करोड़ घरेलू LPG उपभोक्ता हैं और देश की दैनिक खपत 80,000 टन से अधिक है। ऐसे इन जहाजाें से एक दिन से थोड़ी अधिक आपूर्ति हो सकती है।
वितरण
जहाजों में आई LPG का कैसे होगा वितरण?
दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA) अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह ने बताया कि 'नंदा देवी' जहाज की गैस को वाडीनार टर्मिनल के पास समुद्र के बीच ही दूसरे जहाज में ट्रांसफर किया जा रहा है। इसके बाद LPG का आधा स्टॉक एन्नोर पोर्ट और आधा पश्चिम बंगाल के हल्दीआ पोर्ट भेजा जाएगा। इसी तरह, मुंद्रा पोर्ट पर खड़े 'शिवालिक' जहाज से 12,000 टन LPG वाडिनार जाएगी और बाकी गैस को दहेज पोर्ट और मैंगलोर के दो अलग-अलग टर्मिनल्स पर भेजा जाएगा।
संचालन
'शिवालिक' का संचालन कौन करता है?
'शिवालिक' एक विशाल गैस वाहक पोत (VLGC) है, जिसका संचालन शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (COI) द्वारा किया जाता है। इसे सितंबर 2025 में सेवा में शामिल किया था। दक्षिण कोरिया में निर्मित यह टैंकर अपनी श्रेणी के सबसे बड़े टैंकरों में से एक है, जिसकी लंबाई 225 मीटर और चौड़ाई 36 मीटर है। इसे विशेष तापमान-नियंत्रित टैंकों में द्रवीकृत गैस ले जाने के लिए डिजाइन किया है। इसकी क्षमता प्रति यात्रा 40,000 से 46,000 टन LPG के परिवहन की है।
प्रबंधन
'नंदा देवी' का संचालन कैसे होता है?
'नंदा देवी' LPG जहाज को 2001 में जापान के कावासाकी सकाइड वर्क्स द्वारा बनाया गया था। वर्तमान में नार्वे की BW फ्लीट मैनेजमेंट द्वारा प्रबंधित है और भारतीय ध्वज के तहत संचालित है। इसे भारत की पेट्रोलियम जरूरतों के लिए भारतीय नौसेना की सुरक्षा में संचालित किया जाता है। इसका पुराना नाम BW विजन और डायनामिक विजन था। इसकी क्षमता 46,000-47,000 मिट्रिक टन है। यह जहाज भारत के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने वाले प्रमुख वाहकों में शामिल है।
वितरण
जहाजों से भारतीय घरों तक कैसे होगा LPG का वितरण?
बंदरगाह पर LPG को -45 डिग्री सेंटीग्रेट पर प्रशीतित तरल अवस्था में संग्रहीत किया जाता है। इसके बाद उसे यांत्रिक अनलोडिंग भुजाओं के माध्यम से विशाल क्रायोजेनिक भंडारण टैंकों में स्थानांतरित किया जाता है, जहां इसे धीरे-धीरे गर्म किया जाता है और अंतर्देशीय यात्रा के लिए दबावयुक्त किया जाता है। यहां से कांडला-गोरखपुर और पारादीप-हल्दिया-दुर्गापुर लाइनों जैसी देशव्यापी पाइपलाइनों के विस्तारित नेटवर्क के माध्यम भारत में अलग-अलग जगहों पर भेजा जाता है।
जानकारी
पाइपलाइन रहित क्षेत्रों में कैसे पहुंचेगी गैस?
पाइपलाइन रहित क्षेत्रों में गैस को BTGPLN रेल वैगनों या उच्च दबाव वाले सड़क टैंकरों के माध्यम से भेजा जाता है। ये ट्रांसपोर्टर थोक उत्पाद को देश भर में फैले लगभग 215 स्वचालित बॉटलिंग संयंत्रों में से किसी एक तक पहुंचाते हैं।
सिलेंडर
घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडरों में कैसे भरी जाती है गैस?
इन संयंत्रों में तेल उद्योग सुरक्षा निदेशालय (OISD) द्वारा निर्धारित सख्त सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए खाली सिलेंडरों को एक उच्च गति वाले कैरोसेल सिस्टम में डाला जाता है। इसमें उन्हें साफ कर घरेलू उपयोग के लिए 14.2 किलोग्राम और व्यावसायिक उपयोग के लिए 19 किलोग्राम गैस भरी जाती है। यात्रा के अंतिम चरण का प्रबंधन 25,600 से अधिक वितरकों के नेटवर्क द्वारा किया जाता है, जो घरेलू गैस के सक्रिय ग्राहकों को सेवा प्रदान करते हैं।
उत्पादन
घरेलू उत्पादन की क्या है स्थिति?
भारत ने घरेलू LPG उत्पादन में भी लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि की है, जिससे उत्पादन 11.50 लाख टन प्रति माह से बढ़कर लगभग 15 लाख टन हो गया है। अधिकारियों ने बताया कि आपूर्ति में व्यवधान जारी रहने की स्थिति में यह वृद्धि लगभग 15 दिनों तक घरेलू मांग पूरी करने में सहायक हो सकती है। अधिकारियों ने संकेत दिया कि भारतीय जहाजों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति मिलने पर कुछ दिनों में आपूर्ति सामान्य हो सकती है।