उत्तर प्रदेश सरकार का 'ऑपरेशन कायाकल्प' क्या है और इसने कैसे बदली सरकारी स्कूलों की तस्वीर?
क्या है खबर?
उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सालों से बनी 'बदहाली और उपेक्षा' की छवि अब अतीत की बात हो गाई। योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा संचालित 'ऑपरेशन कायाकल्प' देश के सबसे बड़े अंतर-विभागीय स्कूल सुधार अभियानों में से एक बनकर उभरा है। 11,000 करोड़ से अधिक के निवेश और 19 बुनियादी मानकों पर काम करके प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 'स्मार्ट स्कूल' के रूप में पुनर्जीवित किया गया है। आइए इस ऑपरेशन की सफलता पर नजर डालते हैं।
शुरुआत
कब और क्यों हुई थी 'ऑपरेशन कायाकल्प' की शुरुआत?
'ऑपरेशन कायाकल्प' की शुरुआत मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के नेतृत्व में जून 2018 में की गई थी।
इस महत्वाकांक्षी अभियान को शुरू करने का मुख्य कारण राज्य के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों (परिषदीय स्कूलों) की दयनीय स्थिति को सुधारना और सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के समकक्ष लाकर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना था।
साल 2017-18 से पहले सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचागत सुविधाएं केवल 36 से 38 प्रतिशत ही थीं, जिसके कारण बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर बढ़ रही थी।
मानक
'ऑपरेशन कायाकल्प' में क्या सुधार तय किए गए थे?
इस ऑपरेशन के तहत सरकार ने स्कूलों को 4 श्रेणियों में शामिल 19 मानकों के आधार पर सुदृढ बनाना तय किया था।
इनमें शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल, लड़के और लड़िकियों के लिए अलग-अलग शौचालय, दिव्यांग सुलभ शौचालय और रैंप, छात्र-छात्राओं के लिए पर्याप्त यूरिनल्स, हाथ धोने की व्यवस्था, शौचालयों में पानी की आपूर्ति, कक्षाओं की फर्श पर कोटा स्टोन या टाइल्स लगाना, शौचालयों की दीवारों और फर्श पर टाइल्स और सभी कक्षाओं में ब्लैकबोर्ड या ग्रीनबोर्ड लगाना शामिल था।
अन्य
अन्य मानकों में क्या किया गया था शामिल?
अन्य मानकों में बच्चों के बैठने के लिए आधुनिक और मजबूत फर्नीचर, रैंप और रैलिंग, सभी स्कूलों में वैध और सुरक्षित बिजली कनेक्शन, सुरक्षित बिजली वायरिंग और स्विच बोर्ड, हर कक्षा में पंखे और LED बल्ब शामिल थे।
सुरक्षा के लिए स्कूल के चारों ओर दीवार, मुख्य दरवाजे पर लोटे का गेट, सौंदर्यकरण और पर्यावरण के लिए दीवारों की रंगाई, जिससे दीवारों पर बनी पेंटिंग से बच्चे खेल-खेल में सीख सकें और रसोई घर का सुदृढ़ीकरण करना भी शामिल था।
बदलाव
वर्तमान में स्कूलों में क्या आया बदलाव?
इस ऑपरेशन का असर यह हुआ कि राज्य के प्राथमिक स्कूलों में बुनियादी ढांचागत सुविधाओं का स्तर 2017-18 के मात्र 36 प्रतिशत से बढ़कर अब 96.30 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
स्कूलों में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय, दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शौचालय, 96 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में शुद्ध पेयजल की पाइपलाइन व्यवस्था, हाथ धाने के लिए कई नलों की कतार, 3.42 लाख से अधिक टेबल-कुर्सी और कक्षाओं में टाइल्स और आधुनिक ब्लैकबोर्ड बनाए जा चुके हैं।
सुरक्षा
सुरक्षा के लिहाज से आया यह बदलाव
ऑपरेशन से पहले अधिकतर स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी, जो अब लगभग 90 प्रतिशत स्कूलों में बना दी गई है।
इसी तरह स्कूलों के प्रवेश द्वारा पर लोहे के मजबूत दरवाजें लगाए गए हैं।
पहले दिव्यांग बच्चों के लिए क्लासरूम और टॉयलेट तक पहुंचने के लिए कोई व्हीलचेयर रैंप या रैलिंग नहीं थी। अब सभी नए और नवीनीकृत भवनों में दिव्यांग-अनुकूल रैंप और रैलिंग अनिवार्य रूप से निर्मित की गई है।
90 प्रतिशत स्कूलों में पेंटिंग भी हो चुकी है।
डिजिटल
ऑपरेशन के तहत स्कूलों में आई डिजिटल क्रांति
इस ऑपरेशन के तहत राज्य के सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में 2 लाख से अधिक स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जा चुके हैं। यहां प्रोजेक्टर और ऑडियो-विजुअल माध्यमों से पढ़ाई कराई जा रही है।
इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कंप्यूटर लैब्स, हाई-स्पीड वाई-फाई और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है।
शिक्षकों और स्कूलों को 2 लाख से अधिक टैबलेट्स दिए गए हैं। 1.30 लाख से अधिक स्कूलों में आकर्षक पुस्तकालय और डिजिटल रीडिंग स्पेस बनाए गए हैं।
लाभ
ऑपरेशन से क्या हुआ लाभ?
इस ऑपरेशन के बाद सुरक्षा और अलग शौचालय की कमी के कारण स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या 19 प्रतिशत से कम होकर महज 3 प्रतिशत पर आ गई है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।
अत्याधुनिक स्कूल भवनों को देखकर ग्रामीण अभिभावक अब बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों में करा रहे हैं।
इसी तरह स्कूलों में नामांकित बच्चों की संख्या लगभग 2 करोड़ के पार पहुंच गई है, जो 2017 से पहले केवल 1.30 करोड़ के आसपास सिमटी हुई थी।
खर्च
ऑपरेशन पर कितना हुआ खर्च और सरकार ने कैसे की व्यवस्था?
इस ऑपरेशन राज्य के सभी 75 जिलों के 1.3 लाख से अधिक स्कूलों में चलाया गया है। इस पर अब तक लगभग 11,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।
इसके लिए सरकार किसी एक एकल बजट पर निर्भर नहीं रही, बल्कि इसमें कन्वर्जेंस मॉडल का उपयोग किया गया है।
इसमें ग्राम निधि, 15वां वित्त आयोग, मनरेगा, राज्य वित्त और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड को शामिल किया है।
इसी ने ऑपरेशन को सफल बनाने में मदद की।
परेशानियां
ऑपरेशन के संचालन में क्या आई परेशानियां और कैसे किया गया समाधान?
ऑपरेशन की शुरुआत में बेसिक शिक्षा विभाग, पंचायती राज, जल निगम और ग्राम विकास विभागों में तालमेल का अभाव होने से काफी परेशानी आई थी।
इसके बाद सरकार ने 'कन्वर्जेंस मॉडल' लागू किया। जिला स्तर पर जिला कलक्टर और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) की अध्यक्षता में टास्क फोर्स बनाई गई, जिससे सभी विभागों को एक मंच पर जवाबदेह बनाया गया।
इसी तरह घटिया सामग्री के इस्तेमाल की समस्या को रोकने के लिए 'प्रेरणा पोर्टल' लॉन्च किया गया।