गृह मंत्रालय की जनसांख्यिकी समिति संपत्ति-वाहन खरीद के आधार पर मांग रही धर्म-वार आंकड़े- रिपोर्ट
क्या है खबर?
गृह मंत्रालय की अगुवाई वाली जनसांख्यिकीय बदलावों पर उच्च-स्तरीय समिति (HLCDC) ने राज्यों से पिछले 15 साल का ऐसा आंकड़ा मांगा है, जिसे धर्म के हिसाब से अलग-अलग करके बताया गया हो। द हिंदु की रिपोर्ट के मुताबिक, समिति गाड़ी और प्रॉपर्टी खरीदने, स्कूल में दाखिले, आधार कार्ड, वोटर आदि से जुड़ा धर्म के आधार पर आंकड़े जानना चाहती है। राज्य सरकारें उलझन में हैं, क्योंकि उनके विभाग धर्म के आधार पर जानकारी इकट्ठा नहीं करते हैं।
राय
समिति ने क्या-क्या मांगी है जानकारी?
रिपोर्ट के मुताबिक, HLCDC ने राज्यों से पिछले 15 वर्षों के जन्म और वाहन पंजीकरण, स्कूल नामांकन और संपत्ति लेनदेन से संबंधित धर्मवार आंकड़े मांगे हैं।
साथ ही, धार्मिक संरचनाओं का जिलावार विवरण, आधार कार्ड, मतदाता पहचान-पत्र और राशन कार्ड पंजीकरण में असामान्य वृद्धि का विवरण भी मांगा है।
समिति ने अनुसूचित जनजाति समुदायों में धर्मांतरण पर खुफिया आकलन और आयोग की रिपोर्ट, साथ ही कार्यरत नजरबंदी केंद्रों का विवरण और अन्य जानकारी भी मांगी है।
सवाल
कुल पूछे हैं 35 सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार के अधिकारियों ने बताया कि समिति ने 35 प्रश्नों पूछे हैं, जिसके जवाब देना कठिन हैं, क्योंकि संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के तहत धार्मिक श्रेणियों के अंतर्गत डेटा एकत्र करना प्रतिबंधित है।
राज्यों से कहा गया है कि वे सभी श्रेणियों में हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों, मुसलमानों, पारसियों और बौद्धों से संबंधित आंकड़े संकलित करें।
अधिकारियों ने बताया कि जन्म प्रमाणपत्र और निर्वासित अवैध प्रवासियों को छोड़कर, अन्य सभी श्रेणियों के धर्मवार आंकड़े उपलब्ध नहीं थे।
सवाल
इस तरह के सवाल पूछे गए हैं
समिति ने राज्यों ने जिस तरह के सवाल पूछे हैं, उसमें यह कि किस धर्म के लोगों के नाम पर कितने वाहन और वाणिज्यिक वाहन पंजीकरण हुए हैं।
स्कूल में अलग-अलग धर्म के बच्चों का कितना नामांकन है और पिछले 15 साल में धर्म और जिले के हिसाब से मतदाता पंजीकरण में क्या बदलाव हुआ है।
धर्म और जिले के हिसाब से जन्म पंजीकरण और जिले में 15 साल में कितने मंदिर-मस्जिद-चर्च आदि धार्मिक ढांचे बने हैं।
समिति
क्या है ये समिति?
HLCDC का गठन गृह मंत्रालय ने 26 मई, 2026 को किया था और इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर कर रहे हैं।
समिति का मुख्य काम देश के कुछ इलाकों में आबादी में हो रहे बदलावों के पीछे अवैध आव्रजन या अन्य असामान्य कारण को देखना है और उससे निपटने के सुझाव देने हैं।
समिति राज्यों से आंकड़े मांगकर और दौरा करके रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे एक साल में मंत्रालय को सौंपना है।