हिमाचल प्रदेश में 27 साल बाद फिर से शुरू होगी लॉटरी, सरकार ने लिया अहम फैसला
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में लॉटरी को फिर से शुरू करने का फैसला किया है। दिवाली के आसपास लॉटरी की टिकटों की बिक्री शुरू होने की उम्मीद है। सरकार की उम्मीद है कि इस कदम से उसे हर साल करीब 50 करोड़ रुपये की कमाई होगी। सरकार ने इस प्रस्ताव को 31 जुलाई को अपनी मंजूरी दे दी है। केरल और पंजाब जैसे राज्यों की लॉटरी से होने वाली भारी कमाई से प्रेरणा लेकर यह फैसला लिया गया है। पिछले वित्त वर्ष में केरल ने अपनी लॉटरी से 13,582 करोड़ रुपये कमाए थे, जो इस फैसले के पीछे की बड़ी वजह है।
टेंडर के लिए 10 करोड़ की फीस और 30 करोड़ की जमा राशि जरूरी
इस बार लॉटरी की टिकटें ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों ही माध्यमों से बेची जाएंगी। सरकार टेंडर प्रक्रिया के जरिए सिर्फ एक ही सेलिंग एजेंट चुनेगी। इस एजेंट को हर साल 10 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस चुकानी होगी, जिसमें हर साल 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी होगी। इसके साथ ही कंपनी को 30 करोड़ रुपये की सुरक्षा जमा राशि भी जमा करनी होगी। एजेंट को कम से कम 6 करोड़ रुपये की न्यूनतम गारंटीड राशि हर साल सरकार को देनी होगी। लॉटरी के तहत अधिकतम 12 रोजाना ड्रा और 3 बड़े त्योहारों पर खास बंपर ड्रा हर साल आयोजित किए जाएंगे। पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए सख्त डिजिटल नियमों के तहत चलाया जाएगा।
नियंत्रणों के साथ हिमाचल प्रदेश ने लॉटरी को फिर से शुरू किया
याद दिला दें कि हिमाचल प्रदेश ने सामाजिक चिंताओं के चलते 1999 में लॉटरी पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, अब राज्य सरकार इसे और कड़े नियंत्रणों के साथ-साथ नई तकनीकी सुधारों के साथ फिर से शुरू कर रही है। सरकार का मुख्य उद्देश्य है कि राज्य के लिए जरूरी धन जुटाया जा सके, और यह सब पूरी तरह से निष्पक्ष और साफ-सुथरे तरीके से हो।