क्या दिल्ली-NCR में समय से पहले आ गई सर्दी? मौसम विभाग ने दी अहम जानकारी
क्या है खबर?
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लोगों के लिए पिछले कुछ दिनों से हवा में घुली ठंडक सर्दियों का शुरुआती अहसास जरूर हो सकती है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह अभी सर्दियों की अधिकारिक शुरुआत नहीं है। दिल्ली-NCR में हाल ही में हुई बारिश, ठंडी हवाओं और बादलों के बदलते स्वरूप के कारण मौसम में यह बदलाव आया है, जिसे विशेषज्ञ दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई और सर्दियों के बीच का मौसमी बदलाव मान रहे हैं।
कारण
मौसम में आए बदलाव का क्या है कारण?
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस अचानक आई ठंडक के पीछे मुख्य रूप से एक पश्चिमी विक्षोभ जिम्मेदार है, जो भूमध्य सागर से उत्पन्न होकर उत्तर भारत की ओर बढ़ा है।
इस सिस्टम के चलते सप्ताहांत में बादलों का स्वरूप बदला और दिल्ली-NCR के कई हिस्सों में हल्की बारिश हुई।
इसी कारण उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भीर झमाझम बारिश हुई, जबकि मानसून की वापसी की प्रक्रिया भी जारी है। इस मौसम ने सर्दी का अहसास कराया है।
जानकारी
उपग्रह की तस्वीरों में दिखा बदलाव
इस बदलाव को इनसेट-3DS उपग्रह की तस्वीरों में भी देखा गया है, जहां 23 सितंबर को उत्तर भारत में घने बादल छाए हुए थे, वहीं 27 सितंबर तक उत्तर-पश्चिमी और मध्य भारत का आसमान काफी हद तक साफ हो चुका है।
पूर्वानुमान
क्या आगामी दिनों में बढ़ेगा तापमान?
IMD के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली में ठंडक लंबे समय तक टिकने वाली नहीं है और आने वाले दिनों में दोपहर के वक्त मौसम एक बार फिर गर्म होने की संभावना है।
28 सितंबर को हुई हल्की बारिश के बाद 29 सितंबर को अधिकतम तापमान जहां 31 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया, वहीं इसके 3 से 5 अक्टूबर तक बढ़कर 35 डिग्री तक पहुंचने की उम्मीद है।
हालांकि, उसके बाद यह 34 डिग्री पर आ सकता है।
जानकारी
रात में कैसा रहेगा मौसम?
IMD के अनुसार, इस दौरान रात में न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है, जिससे रातें और सुबह का समय काफी आरामदायक और सुहाना बना रहेगा। हालांकि, 6 और 7 अक्टूबर को हल्की बूंदाबांदी की मामूली संभावना है।
बर्फबारी
पहाड़ों में बर्फबारी से मैदानी इलाकों में बढ़ी सर्दी
दिल्ली-NCR में भले ही तापमान फिर से बढ़ने वाला हो, लेकिन हिमालयी क्षेत्रों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है।
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में शनिवार को सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज की गई है। कुल्लू जिले के रोहतांग दर्रे के पास भी हल्की बर्फबारी हुई है।
उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों जैसे हेमकुंड साहिब और बद्रीनाथ धाम में भी भारी बर्फबारी और बारिश दर्ज की गई है, जिससे तापमान में भारी गिरावट आई है।
असर
जलवायु परिवर्तन का दिख रहा असर
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ डीपी डोभाल के अनुसार, सितंबर में बर्फबारी होना हिमालयी ग्लेशियरों के स्वास्थ्य के लिए एक प्राकृतिक और सकारात्मक पैटर्न है।
हालांकि, उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण अब गर्मियों का समय लंबा होता जा रहा है और जो बर्फबारी पारंपरिक रूप से जनवरी-फरवरी में भारी मात्रा में होती थी, वह अब खिसक कर मार्च, अप्रैल या मई के महीनों में देखने को मिल रही है।