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गिर राष्ट्रीय उद्यान में संक्रामक वायरस की दस्तक? अब तक हुई 7 शेरों की मौत
गिर राष्ट्रीय उद्यान में संक्रामक वायरस की चपेट में आने से 7 शेरों की मौत हो चुकी है

गिर राष्ट्रीय उद्यान में संक्रामक वायरस की दस्तक? अब तक हुई 7 शेरों की मौत

May 28, 2026
07:39 pm

क्या है खबर?

गुजरात का गिर राष्ट्रीय उद्यान और भारत का सबसे बड़ा एशियाई शेर संरक्षण केंद्र एक संक्रामक वायरस की चपेट में आने से 7 शेरों की मौत के बाद हाई अलर्ट पर है। यह उद्यान पृथ्वी पर आखिरी स्थान है और वहां एशियाई शेर जंगली अवस्था में रहते हैं। शेरों की मौतों के बाद सरकार भी सकते में आ गई है। उद्यान में सैकड़ों वन कर्मचारियों को तैनात किया है और उच्चतम स्तर पर आपातकालीन समीक्षा बैठकें बुलाई जा रही हैं।

डर

वायरस से फैला एशियाई शेरों के खत्म होने का डर

एशियाई शेर अफ्रीकी शेर का करीबी रिश्तेदार है। ये शेर एक समय एशिया के विशाल क्षेत्र में विचरण करते थे, लेकिन आज इनकी संख्या 700 से भी कम रह गई है। ये सभी शेर वर्तमान में गिर राष्ट्रीय उद्यान की सीमाओं के भीतर ही रहते हैं, जिससे यहां किसी भी बीमारी का प्रकोप पूरी प्रजाति के लिए खतरा बन सकता है। ऐसे में पिछले हफ्तो में हुई 7 शेरों की मौतों ने अधिकारियों का डर और अधिक बढ़ा दिया है।

मौत

कैसे हुई शेरों की मौत?

प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ जयपाल सिंह के अनुसार, मृत शेरों में संक्रामक वायरल बीमारी के लक्षण मिले हैं। प्रारंभिक संदेह कैनाइन डिस्टेंपर वायरस पर केंद्रित है। इसे आमतौर पर CDV भी कहा जाता है। यह बीमारी अपने नाम के बावजूद, बड़ी बिल्लियों सहित जानवरों की एक विस्तृत श्रृंखला को संक्रमित कर सकती है। उन्होंने बताया कि इस वायरस ने अतीत में अफ्रीका में शेरों और चीतों की आबादी को तबाह कर दिया था। ऐसे में जांच जारी है।

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अन्य

शेरों की मौत का अन्य कारण भी हैं?

डॉ जयपाल ने बताया कि एक अन्य संभावित कारण बेबेसिया हो सकता है और इसकी जांच की जा रही है। बेबेसिया एक परजीवी है, जो लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करता है और गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। उन्होंने कहा, "यह निश्चित रूप से कहना मुश्किल है कि यह CDV है या नहीं। नमूनों को परीक्षण के लिए भेजा गया है और परिणाम एक सप्ताह के भीतर आने की उम्मीद है। तब तक सतर्कता बरती जा रही है।"

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कदम

17 शेरों को किया गया है क्वारंटाइन

डॉ जयपाल ने बताया कि 7 शेरों की मौत के बाद एहतियात के तौर पर लक्षण वाले 17 अन्य शेरों को क्वारंटाइन में रखा गया है। इनमें से 8 में संक्रामक वायरस की पुष्टि हो चुकी है, जो कि बेहद गंभीर बात है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 12 पशु चिकित्सकों की एक समर्पित टीम प्रभावित जानवरों के इलाज और निगरानी के लिए 24 घंटे काम कर रही है। शेरों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।

हस्तक्षेप

सरकार ने भी किया हस्तक्षेप

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने स्वयं एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया कि प्रभावित गिर गढ़ाड़ा और बाबरिया क्षेत्रों के 10 किलोमीटर के दायरे में मौजूद सभी शेरों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और अब तक पहचाने गए मामलों के अलावा कोई नया लक्षण नहीं पाया गया है। वन विभाग अमरेली और भावनगर जिलों के राजस्व क्षेत्रों में शेरों की दैनिक स्वास्थ्य जांच भी कर रहा है।

गंभीरता

बीमारी को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं अधिकारी

सरकार का हस्तक्षेप दर्शाता है कि अधिकारी इस प्रकोप को कितनी गंभीरता से ले रहे हैं। गिर के अंदर वन विभाग के लगभग 250 कर्मियों को तैनात किया गया है। इसी तरह जामनगर, सूरत, राजकोट, कच्छ और जूनागढ़ से अतिरिक्त अधिकारियों और कर्मचारियों को बुलाया गया है। इनमें से कई पहले भी गिर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसी तरह जूनागढ़ पशु चिकित्सा महाविद्यालय के चिकित्सा विशेषज्ञ भी इस प्रयास में शामिल हो गए हैं।

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