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सुप्रीम कोर्ट से निष्क्रिय इच्छामृत्यु पाने वाले हरीश राणा का हुआ निधन
सुप्रीम कोर्ट से निष्क्रिय इच्छामृत्यु पाने वाले हरीश राणा का हुआ निधन

सुप्रीम कोर्ट से निष्क्रिय इच्छामृत्यु पाने वाले हरीश राणा का हुआ निधन

लेखन गजेंद्र
Mar 24, 2026
05:26 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट से निष्क्रिय इच्छामृत्यु का अधिकार पाने वाले 32 वर्षीय हरीश राणा का मंगलवार को निधन हो गया। उन्होंने दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में 13 साल से अधिक समय तक कोमा में रहने के बाद मंगलवार को अंतिम सांस ली। कोर्ट ने 11 मार्च को ऐतिहासिक फैसले में राणा का जीवन रक्षक उपचार हटाने को कहा था, ताकि उनको दर्दनाक और असहनीय जीवन से छुटकारा दिलाया जा सके।

निधन

10 दिन से बंद था उनका जीवन रक्षक उपचार

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 14 मार्च को राणा को गाजियाबाद स्थित उनके घर से AIIMS डॉ बीआर अंबेडकर इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल की उपशामक देखभाल इकाई में लाया गया था। निष्क्रिय इच्छामृत्यु की प्रक्रिया के लिए एनेस्थीसिया और पैलिएटिव मेडिसिन विभाग की प्रमुख डॉ सीमा मिश्रा के नेतृत्व में एक विशेष चिकित्सा दल का गठन किया गया। इसके बाद उनके जीवन रक्षक उपचार को बंद किया गया था, जिससे मंगलवार को उनका स्वाभाविक निधन हो गया।

मामला

क्या है मामला?

राणा पंजाब विश्वविद्यालय में B.Tec के छात्र थे। वह 2013 में चंडीगढ़ में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। उनके सिर में गंभीर चोटें आईं और कोमा में चले गए। उसके बाद से राणा बिस्तर पर हैं। खाने में वे पाइप के जरिए केवल तरल पदार्थ लेते हैं। माता-पिता ने उनके इलाज के लिए नौकरी छोड़ दी, घर बेच दिया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद परिजनों ने इच्छामृत्यु के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

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फैसला

कोर्ट ने क्या कहा था?

सुनवाई के दौरान राणा के वकील ने रिपोर्ट के आधार पर कहा था कि इस तरह का इलाज जारी रखना गरिमा के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन है। इसके बाद कोर्ट ने आदेश दिया कि जीवन रक्षक उपकरण को एक सुनियोजित योजना के तहत हटाया जाए ताकि गरिमा बनी रहे। कोर्ट ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को भी ऐसे मामलों के लिए प्राथमिक और द्वितीयक चिकित्सा बोर्ड बनाने को कहा, जिसकी जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी जाए।

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