क्या भारत-फ्रांस समेत अन्य देशों में हो रहे विरोध-प्रदर्शन बड़े वैश्विक नेटवर्क से जुड़े हैं?
क्या है खबर?
फ्रांस में बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था और भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के बीच एक वैश्विक नेटवर्क का संकेत मिला है। फॉक्स न्यूज़ डिजिटल की एक जांच में 13 देशों के 101 संगठनों की पहचान की गई है, जिन पर आरोप है कि वे विरोध प्रदर्शनों को मदद कर रहे हैं, आयोजित कर रहे हैं या बढ़ा रहे हैं। इसी जांच में फ्रांस और भारत के विरोध-प्रदर्शन में संभावित संबंध का पता चला है।
प्रदर्शन
101 संगठन की पहचान
फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में 9 देशों में 101 संगठन की पहचान की गई है, जो रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम (इस्लामिस्ट और कम्युनिस्ट ग्रुप्स का मतलब) से जुड़े हैं।
ये यूरोप में बढ़ते प्रोटेस्ट इकोसिस्टम में प्रोटेस्ट को मदद, आयोजित या बढ़ा रहे हैं। इसमें कम्युनिस्ट और सोशलिस्ट संगठन, मजदूर संगठन, छात्र समूह, कानूनी नेटवर्क और मीडिया आउटलेट शामिल हैं।
ये ग्रुप सीमा पार विरोध के संदेश फैलाने और आंदोलनों को अलग-अलग स्थानीय शिकायतों से जोड़ने में मदद कर रहे हैं।
मदद
कैसे काम कर रहे ये संगठन?
रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस के एक संगठन इंडियन अलायंस पेरिस (IAP) को फ्रेंच और भारतीय विरोध संदेश को जोड़ने के तौर पर मार्क करती है, और कहती है कि यह मैनहट्टन में पीपल्स फोरम के साथ पार्टनरशिप में है।
रिपोर्ट बताती है कि कैसे ट्रांसनेशनल एंटी-कैपिटलिस्ट ऑर्गनाइजेशन प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल (PI) ने 16 अक्टूबर को अपनी वेबसाइट पर एक ब्रीफिंग में फ्रांस, स्पेन, भारत और अल्बानिया में चल रहे मौजूदा विरोध को साफतौर पर ग्रुप में बांटा।
दावा
शंघाई के नेविल रॉय सिंघम द्वारा फंड
IAP फ्रांस में मौजूद छात्र, शोधार्थी और पेशेवरों का एक संगठन है। यह उन समूह में से एक है जो फ्रेंच और इंडियन प्रोटेस्ट मैसेजिंग को जोड़ते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय अशांति को कम्युनिस्ट समर्थक संगठनों के एक नेटवर्क से भी सहानुभूति मिल रही है, जिसमें ब्रेकथ्रू न्यूज़, CODEPINK और पार्टी फॉर सोशलिज़्म एंड लिबरेशन शामिल हैं, जिन्हें शंघाई में रहने वाले अमेरिकी मूल के टेक टाइकून नेविल रॉय सिंघम द्वारा फंड और सपोर्ट किया जाता है।
दावा
कौन हैं सिंघम?
सिंघम से जुड़े संगठन पर जांच के बाद पता चला कि वे अमेरिका में जन्मे टेक्नोलॉजी एंटरप्रेन्योर हैं, जो चीन के शंघाई में रहते हैं और कम्युनिस्ट और सोशलिस्ट ग्रुप्स के नेटवर्क से जुड़े हैं।
ब्रेकथ्रू न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में, सिंघम की पत्नी, CODEPINK की को-फाउंडर जोडी इवांस ने 14 अक्टूबर को कहा, "मैं चाहती हूं कि लोग फ्रांस, स्पेन और भारत को देखें और बस कहें, हम कहां हैं? हम सड़कों पर क्यों नहीं हैं?"