असम में बाढ़ के बीच 'ज्ञान की नाव': लहरों पर चल रहे स्कूल, बच्चों का भविष्य सुरक्षित!
हर साल मानसून की बाढ़ असम के कई गांवों को बाकी दुनिया से काट देती है। ऐसे में बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है और उनकी पढाई रुक जाती है। इसी समस्या को देखते हुए कुछ संस्थाओं ने एक अनोखा हल निकाला है: नावों पर चलते-फिरते स्कूल। ये चलते-फिरते स्कूल बाढ़ से घिरे नदी के 'चर' इलाकों (नदी के टापुओं) में जाते हें। इनका मकसद है कि पानी बढ़ने पर भी बच्चों की पढाई न रुके।
सोलर नावें सीखने के केंद्र के रूप में काम कर रहीं
कुछ नावें तो सोलर पैनलों से चलती हें। इनमें रोशनी, पंखे, कंप्यूटर और ई-लर्निंग के लिए जरूरी चीजें भी लगी होती हें। शिक्षक इन नावों पर आसपास के गांवों से आए बच्चों को किताबों और ब्लैकबोर्ड की मदद से पढ़ाते हें। कई बार तो मानसून के मौसम में इन बच्चों के लिए स्कूल पहुंचने का यह इकलौता तरीका होता है। ये नावें सिर्फ स्कूल ही नहीं, बल्कि गांव वालों के लिए समुदाय केंद्र का भी काम करती हें। यहां स्वच्छता और आपदा से बचाव के तरीकों पर भी बातचीत और सत्र होते रहते हें।