दिल्ली में अप्रैल से महंगी होने वाली है बिजली, जानिए कारण और सरकार की योजना
क्या है खबर?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लोगों को महंगाई का एक और झटका लगने वाला है। दरअसल, वहां अप्रैल से बिजली की दरों में वृद्धि होने का अनुमान है। इसका मुख्य कारण दिल्ली सरकार की ओर से बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का लंबित बकाया चुकाना है। सरकार ने इसकी काफी हद तक तैयारी भी कर ली है। जिसके चलते दिल्ली में अप्रैल से बिजली की दरों में बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है। आइए इस संबंध में सरकार की योजना जानते हैं।
भुगतान
दिल्ली सरकार ने की 38,000 करोड़ के भुगतान की तैयारी
समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, दिल्ली सरकार राजधानी क्षेत्र में काम करने वाली तीनों निजी बिजली वितरण कंपनियों को तकरीबन 38,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया चुकाने की तैयारी कर रही है। इन वितरण कंपनियों में BSES राजधनी पावर लिमिटेड (BRPL), BSES यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) और टाटा पावर दिल्ली वितरण लिमिटेड (TPDDL) शामिल हैं। इन बिजली कंपनियों का भुगतान पिछले 10 साल से बकाया चल रहा था। ऐसे में अब उन्हें भुगतान किया जा रहा है।
बोझ
क्या उपभोक्ताओं पर बढ़ेगा बोझ?
दिल्ली सरकार ने बिजली कंपनियों को भुगतान करने के बाद बिजली दरों में होने वाली बढ़ोतरी का उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए भी कदम उठाया है। सरकार बिजली के दरों में बढ़ोतरी पर उपभोक्ताओं को सब्सिडी देने की योजना बना रही है। सरकार का दावा है कि सब्सिडी के चलते दिल्ली के लोग इससे प्रभावित नहीं होंगे। सरकार दिल्ली के लोगों के हित का ध्यान रखते हुए काम कर रही है।
कारण
सरकार बिजली कंपनियों को क्यों कर रही है भुगतान?
बता दें कि पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि दिल्ली की तीनाें बिजली कंपनियों को 7 साल के भीतर 27,200 करोड़ रुपये की वहन लागत सहित नियामक परिसंपत्तियों का भुगतान किया जाए। नियामक परिसंपत्तियां वे लागतें हैं जिनकी भविष्य में वसूली होने की उम्मीद है। आम आदमी पार्टी (AAP) के शासनकाल में पिछले दशक में बिजली की दरों में कोई वृद्धि न होने के कारण नियामक परिसंपत्तियों में तेजी से इजाफा हुआ है।
बकाया
दिल्ली में कितनी हैं नियामक परिसंपत्तियां?
इसी साल जनवरी में दिल्ली विद्युत नियामक आयोग ने केंद्रीय एजेंसी, विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण को सूचित किया था कि राजधानी में कुल नियामक परिसंपत्तियां 38,552 करोड़ रुपये हैं। दाखिल दस्तावेज के अनुसार, BRPL की हिस्सेदारी 19,174 करोड़ रुपये, BYPL की 12,333 करोड़ रुपये और TPDDL की हिस्सेदारी 7,046 करोड़ रुपये है। ये राशियां निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वितरण कंपनियों द्वारा किए गए स्वीकृत व्यय को दर्शाती हैं।
ब्याज
ब्याज वृद्धि और वसूली योजना
अधिकारियों ने बताया कि वर्षों से विलंबित वसूली के कारण ब्याज के बढ़ने से कुल बोझ काफी बढ़ गया। कोर्ट ने नियामक को वसूली योजना तैयार करने, वहन लागतों को ध्यान में रखने और बढ़ते नियामक परिसंपत्तियों के निपटान में एक दशक से हो रही देरी का विस्तृत लेखापरीक्षा करने का निर्देश दिया है। उम्मीद है कि वसूली का असर उपभोक्ताओं के बिलों में बढ़े हुए नियामक परिसंपत्ति अधिभार के रूप में दिखेगा, जिसे 7 वर्षों में लागू किया जाएगा।
मजबूरी
क्यों जरूरी है बिजली की दरों में बढ़ोतरी?
विशेषज्ञों के अनुसार, डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति सुधारने और बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाने के लिए यह कदम जरूरी हो सकता है। लंबे समय से लंबित बकाया और लागत के दबाव के चलते दरों में संशोधन की जरूरत महसूस की जा रही है। दिल्ली में बिजली दरों में बढ़ोतरी की आहट तो साफ है, लेकिन सरकार संतुलन बनाते हुए उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में भी कदम उठा रही है। हालांकि, इससे होने वाला फायदा अभी साफ नहीं है।