चुनाव आयोग ने विवाद के बीच फॉर्म-6 में सुधार किया, SIR से जुड़ी घोषणा हटाई
क्या है खबर?
चुनाव आयोग ने देशभर में उठ रहे सवालों के बीच बड़ा यू-टर्न लिया है। उसने उन राज्यों में अपने ECINet पोर्टल पर फॉर्म-6 के ऑनलाइन संस्करण से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) घोषणा हटा दी है, जहां अभी SIR चल रहा है। बता दें कि 2 चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में 14 नोट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के जिन फैसलों पर एतराज जताया था, उसमें फॉर्म-6 में बदलाव भी शामिल था।
बदलाव
फॉर्म-6 में क्या हुआ सुधार?
नए मतदाताओं के फॉर्म-6 के ऑनलाइन नामांकन के खंड J और K के बीच डाली गई घोषणा अब फॉर्म-6 का हिस्सा नहीं है।
इस घोषणा में आवेदकों को 3 बयानों में एक चुनना अनिवार्य था।
इसमें पूछा गया था कि क्या उनका नाम 2000 में आयोजित अंतिम SIR के दौरान मतदाता सूची में था, क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम था, माता-पिता और उनका नाम उसमें नहीं था।
इसे भरे बिना आवेदन आगे नहीं बढ़ सकता था।
सुधार
सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देने के बाद सुधार
आयोग ने यह सुधार तब किया है, जब उसने 26 अक्टूबर को फाइल किए गए अपने जवाबी हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसके ER (इलेक्टोरल रोल) डिवीजन ने 21 अक्टूबर को दोनों को बांटने का फैसला किया था।
हलफनामे में कहा गया है कि SIR से जुड़ा फॉर्म-6 के अंदर रखा गया था ताकि आवेदक 2 के बजाय एक ही OTP और एक ही ई-सिग्नेचर जेनरेट कर सके।
आपत्ति
आयुक्तों ने उठाया था फॉर्म में बदलाव पर सवाल
इंडियन एक्सप्रेस ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें बताया था कि चुनाव आयुक्त जोशी ने 16 मई को लिखा था कि फॉर्म में कानूनी बदलाव के बिना ऐसा कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
संधू ने 13 अगस्त को इसे गैर-कानूनी कहा था। हालांकि, यह घोषणा अब पोर्टल पर एक अलग फॉर्म के तौर पर उपलब्ध है।
विपक्ष इसी को लेकर हमलावर है, जिसका कहना है कि फॉर्म में कोई बदलाव बिना संसद की मंजूरी के नहीं हो सकता।