दिल्ली होटल आग: कूदने के लिए गद्दे और CPR, बचावकर्मियों ने कैसे बचाई लोगों की जान?
क्या है खबर?
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टेज नामक बेड-एंड-ब्रेकफास्ट होटल में बुधवार को लगी भीषण आग की घटना में स्थानीय लोगों के बचाव अभियान में शामिल होने की मानवीय कहानी सामने आई है। इस आग त्रासदी में 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 10 भारतीय, 9 अफ्रीकी और 2 तुर्कमेनिस्तान के नागरिक हैं। करीब 58 लोगों को बाहर निकाला गया था। ऐसे में आइए जानते हैं स्थानीय लोगों ने आग के बीच अन्य लोगों की जान कैसे बचाई।
हालात
स्थानीय लोगों ने किन हालातों में बचाई लोगों की जान?
हौज रानी इलाके में स्थित 5 मंजिला होटल में आग लगने के कुछ ही देर बाद इमारत में तेजी से घना धुआं भर गया, जिससे अंदर फंसे लोगों का दम घुटना शुरू हो गया। जैसे ही लोग मदद के लिए चिल्लाने लगे और कुछ लोगों ने जान बचाने की हताश कोशिश में ऊपरी मंजिलों की खिड़कियों से छलांग लगाना शुरू किया, तो कुछ स्थानीय निवासियों ने मौके पर पहुंचकर अपने प्रयासों से लोगों की जान बचाना शुरू कर दिया।
प्रयास
लोगों के कूदने के लिए होटल के बाहर बिछाए गद्दे
बचार्व कार्य में शामिल हुए मोहम्मद अफजल ने इंसानियत का धर्म निभाते हुए घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव उपाय शुरू किए। उन्होंने इंडिया टुडे से कहा, "जब मैं और मेरे भाई पहुंचे, तो भीषण आग लग चुकी थी। हमने सड़क के उस पार की दुकान से गद्दे लाकर जल्दी से बिछा दिए ताकि लोग कूद सकें। हमने लोगों से कूदने का आग्रह किया। इस दौरान कुछ लोग सफलतापूर्वक कूद गए, लेकिन अन्य ऊंचाई के डर से नहीं कूद पाए।"
तरीका
लोगों ने बेड शीटों के सहारे लटककर बचाई अपनी जान
अफजल ने कहा, "कुछ लोगों ने होटल की खिड़कियों से बेड शीटों के सहारे लटककर अपनी जान बचाई। आग के और तेज होने पर हाजी साहब ने पुलिस स्टेशन और दमकल कर्मियों को फोन किया।" उन्होंने कहा, "आखिरकार दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पा लिया। तभी हम इमारत में प्रवेश कर पाए और फंसे हुए लोगों को बाहर निकाल पाए। इस तरह से उनक प्रयास कई लोगों की जान बचाने में सफल हो गए।"
मदद
आस-पास के दुकान संचालकों ने भी मदद में बढ़ाया हाथ
अफजल ने कहा, "आस-पास के दुकानदारों ने अपनी दुकान के सामान को नुकसान पहुंचाने के बावजूद हमारी मदद करने में कोई संकोच नहीं किया। हमने उनसे बेट शीटें भी लीं, जिनका इस्तेमाल हमने घायलों को नीचे लाने के लिए किया, क्योंकि हमारे पास उन्हें ले जाने के लिए कोई उचित उपकरण नहीं थे।" उन्होंने कहा, "आग के गुबार को देखकर हर कोई किसी भी सूरत में लोगों को बचाने के लिए लालायित नजर आ रहा था।"
प्रशिक्षण
वसीम राजा ने अपने चिकित्सकीय प्रशिक्षण का किया इस्तेमाल
एक अन्य बचावकर्मी वसीम राजा ने कहा, "मैं हौज रानी गांव का हूं और मैक्स अस्पताल में काम करता हूं। हमारे प्रशिक्षण के हिस्से के रूप में हमें आग या अन्य आपात स्थितियों जैसी सामूहिक हताहतों की स्थिति से निपटने और CPR देने का तरीका सिखाया जाता है।" उन्होंने कहा, "मैंने इस प्रशिक्षण का भरपूर उपयोग जलती हुई इमारत के अंदर और बाद में बचे हुए लोगों को बाहर निकालने के बाद उन्हें एम्बुलेंस में ले जाते समय किया।"
सतर्कता
राजा ने अस्पताल प्रबंधन टीम को समय पर दी मौके की जानकारी
राजा ने कहा, "मैंने अस्पताल प्रबंधन टीम को स्थिति की पूरी जानकारी दी। टीम के समय पर पहुंचने के कारण हम कई जानें बचाने में सफल रहे।" उन्हाेंने कहा, "मुझे राहत है कि अंदर फंसे लोग शारीरिक रूप से जले नहीं थे, वे धुएं के कारण केवल बेहोश हो गए थे। जिन लोगों को CPR की आवश्यकता पड़ी, उनके चेहरे धुएं से पूरी तरह काले पड़ गए थे, हालांकि उनकी त्वचा जली नहीं थी। इससे वह बचने में सफल रहे।"
जानकारी
राजा ने मुंह से मुंह लगाकर दी सांस
राजा ने कहा, "स्वच्छता संबंधी चिंताओं की अनदेखी करते हुए और औपचारिक अनुमति के बिना हमने उन्हें मुंह से मुंह लगाकर सांस दी। इन्हीं प्रयासों के कारण कुछ जानें बचाई जा सकीं, जबकि दुर्भाग्यवश कुछ को नहीं बचाया जा सका।"
समर्पण
दुकान संचालक ने लोगों को बचाने के लिए निकाले सभी गद्दे
इस अग्निकांड के बीच एक पिता-पुत्र की जोड़ी मानवता के प्रतीक के रूप में उभरी। रियाज़ुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान मंसूरी ने अपनी गद्दे की दुकान खाली कर दी और जलती हुई इमारत के नीचे सड़क पर सारे गद्दे बिछा दिए ताकि फंसे हुए लोग कूदकर सुरक्षित बाहर निकल सकें। देशभर में खिड़कियों से कूदते लोगों के जो भयावह दृश्य देखने को मिले, वे उनकी सूझबूझ के कारण ही संभव हो पाए। इस प्रयास से वह काफी खुश हैं।