बिमोल अकोईजाम को राहत, कोर्ट ने JNU में यौन उत्पीड़न के आरोपों पर बर्खास्तगी रोकी
क्या है खबर?
दिल्ली हाई कोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर और कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजाम को बड़ी राहत दी है। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने यौन उत्पीड़न के आरोपों पर उनकी बर्खास्तगी पर रोक लगा दी। कोर्ट ने अंतरिम आदेश तब दिया, जब अकोईजाम ने कोर्ट को बताया कि फैसला लेने से पहले उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला था। कोर्ट ने कांग्रेस सांसद की याचिका पर JNU को नोटिस भी जारी किया है। अगली सुनवाई जनवरी 2027 में होगी।
सुनवाई
अकोईजाम ने कोर्ट से क्या कहा?
अकोईजाम ने कोर्ट में याचिका दायर कर JNU कैंपस में उनको आधिकारिक घर से निकाले जाने और नौकरी से बर्खास्त करने के फैसले को चुनौती दी है।
उनका कहना है कि विश्वविद्यालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) नियम और JNU कानून के तहत तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया और उनको नोटिस तक नहीं भेजा।
उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें राजनीति से प्रेरित होकर निकाला गया है और उन्हें अपनी बात रखने का सही मौका तक नहीं दिया गया।
आरोप
अकोईजाम पर क्या है आरोप?
अकोईजाम 2024 में आंतरिक मणिपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए हैं। वे JNU के स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में प्रोफसर भी हैं।
मई में उन पर 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, जिसके बाद JNU ने अपनी इंटरनल कंप्लेंट्स कमिटी (ICC) से जांच करवाई और रिपोर्ट में अकोईजाम को दोषी बताते हुए 9 अक्टूबर को बर्खास्त कर दिया।
छात्राओं का आरोप है कि प्रोफेसर बैठक के बहाने कैंपस स्थित घर बुलाते थे और छेड़खानी करते थे।
राजनीति
मामले ने राजनीतिक रूप लिया
अकोईजाम के मामले ने राजनीतिक रूप ले लिया है। भाजपा दिल्ली से लेकर मणिपुर तक विरोध-प्रदर्शन कर रही है। महिला और युवा इकाई ने इंफाल में मार्च निकाला है।
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने अकोईजाम को पद छोड़ने के लिए कहा, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने राहुल गांधी पर सवाल उठाया है।
भाजपा की महिला सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर अकोईजाम को संसद से बर्खास्त करने की मांग कर चुका है।