क्या जजों के भत्तों पर लगेगा टैक्स? दिल्ली हाई कोर्ट ने रोकी रिटर्न प्रोसेसिंग
दिल्ली हाई कोर्ट ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को आदेश दिया है कि वह नए टैक्स सिस्टम के तहत सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों द्वारा भरे गए टैक्स रिटर्न की प्रोसेसिंग पर अभी रोक लगा दे। यह फैसला तब आया जब एक याचिका में यह दलील दी गई कि जजों को मिलने वाले कुछ खास फायदे, जैसे मुफ्त घर और ट्रैवल अलाउंस, नए नियमों की वजह से अचानक टैक्स के दायरे में नहीं आने चाहिए।
जजों के भत्तों पर टैक्स लगाने पर बहस
1954 और 1958 के कानूनों के तहत जजों को कुछ खास फायदे मिलते हैं। अब इस बात पर चर्चा चल रही है कि नए टैक्स सिस्टम, जिसमें छूट कम मिलती है, क्या इसके तहत इन फायदों को भी टैक्सेबल इनकम माना जाएगा। फिलहाल, जज अपने टैक्स रिटर्न भर या अपडेट तो कर सकते हैं, लेकिन कोर्ट का आखिरी फैसला आने तक इनकी प्रोसेसिंग नहीं होगी। कोर्ट को यह तय करना है कि क्या जजों को मिलने वाले इन खास फायदों को नए टैक्स बदलावों से सुरक्षा मिलेगी या नहीं।