दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूजलॉन्ड्री को दिया आदेश, कहा- आजतक को बदनाम करने वाली सामग्री हटाओ
क्या है खबर?
दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को मीडिया की आलोचना करने वाले डिजिटल मंच न्यूजलॉन्ड्री को आज तक और इंडिया टुडे को बदनाम करने वाली कुछ सामग्री को हटाने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति सी हरि शंकर और ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने न्यूजलॉन्ड्री और टीवी -टुडे की ओर से दायर दो संबंधित क्रॉस अपीलों पर अंतरिम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने जिन सामग्रियों को हटाने को कहा है, उसमें न्यूजलॉन्ड्री ने टीवी-टुडे की कुछ सामग्री को "बकवास" कहा था।
आदेश
सामग्री को अपमानजनक माना
कोर्ट ने माना कि डिजिटल मंच के कुछ बयान प्रथम दृष्टया अपमानजनक थे और उनकी निरंतर उपलब्धता टीवी-टुडे की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाएगी। कोर्ट ने कहा, "इस निष्कर्ष से सहमत हैं कि प्रथम दृष्टया व्यावसायिक मानहानि का मामला बनता है। एकल न्यायाधीश के विवादित आदेश में उल्लिखित कथन किसी स्वतंत्र मानदंड के बिना हैं और पक्षपातपूर्ण हैं। इस प्रकार की क्षति की भरपाई मौद्रिक मुआवजे या किसी अन्य राहत से नहीं की जा सकती। इसलिए, अंतरिम सुरक्षा आवश्यक है।"
विवाद
क्या है मामला?
टीवी-टुडे ने अक्टूबर 2021 में न्यूजलॉन्ड्री के खिलाफ मुकदमा दायर कर आरोप लगाया था कि उसने वीडियो और लेख से उनकी प्रतिष्ठता धूमिल की। न्यूजलॉन्ड्री ने तर्क दिया कि उसकी सामग्री आलोचना और व्यंग्य थी, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। जुलाई 2022 में हाई कोर्ट की एकल पीठ ने टीवी-टुडे को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद टीवी-टुडे ने अंतरिम राहत से इनकार को और न्यूजलॉन्डी ने 'प्रथम दृष्टया मामला बनता है' के तर्क को चुनौती दी।