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दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से पूछा- आप जंतर-मंतर विरोध स्थल बंद क्यों नहीं कर देते?
दिल्ली में जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान काफी भीड़ उमड़ी थी (फाइल तस्वीर)

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र से पूछा- आप जंतर-मंतर विरोध स्थल बंद क्यों नहीं कर देते?

लेखन गजेंद्र
Aug 07, 2026
02:52 pm

क्या है खबर?

दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी के बीचो-बीच जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए अनुमति देने पर केंद्र सरकार पर सवाल उठाया है। न्यायमूर्ति अमित महाजन ने शुक्रवार को कहा कि राजधानी के बीच इस तरह के विरोध-प्रदर्शनों के कारण शहर को अनावश्यक रूप से बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि वह विरोध प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर क्षेत्र को बंद करने पर विचार क्यों नहीं कर रही है।

बयान

जंतर-मंतर से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने की टिप्पणी

न्यायमूर्ति महाजन ने ये टिप्पणियां तब की, जब वे अखिल भारतीय दलित ईसाई अधिकार संरक्षण समिति की ओर से दायर एक याचिका की सुनवाई कर रहे थे।

याचिका में दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति मांगने वाली याचिका पर निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय घोष ने कोर्ट को बताया कि पुलिस न तो अनुरोध खारिज कर रही है और न ही स्वीकार किया है।

याचिका

कोर्ट ने सरकार से पूछा सवाल

इस पर कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से पूछा कि सरकार इसे बंद क्यों नहीं करती।

न्यायमूर्ति महाजन ने कहा, "आप इसे बंद क्यों नहीं कर देते? यह दिल्ली के अंदर नहीं होना चाहिए, लेकिन यह सरकार का फैसला है। शहर को बेवजह बंधक क्यों बनाया जाए?"

शर्मा ने जवाब दिया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यही है और कोर्ट इसपर विचार कर रही है कि क्या "जंतर-मंतर वास्तव में एक नामित विरोध स्थल बन सकता है।

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टिप्पणी

न्यायमूर्ति महाजन बोले- मेरा नजरिया अलग है

अधिवक्ता घोष ने पूछा कि क्या केंद्र दिल्ली में कोई विरोध-प्रदर्शन नहीं चाहती है, जिस पर न्यायमूर्ति बोले, "यह पुलिस को तय करना है। अगर वे शहर के अंदर विरोध प्रदर्शन बर्दाश्त नहीं कर सकते, तो..."

घोष ने कहा कि शाहीन बाग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन का अधिकार दिया है।

न्यायमूर्ति महाजन ने दोहराया, "व्यक्तिगत रूप से, आप मुझसे पूछें, तो मेरा दृष्टिकोण अलग है। जब पूरा शहर अस्त-व्यस्त हो जाता है, तो ऐसा क्यों होना चाहिए?"

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धरना

छात्रों के प्रदर्शन में थम गई थी दिल्ली

कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की है, जब NEET पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुआ था।

इसके बाद 20 जुलाई को छात्रों ने संसद कूच किया और उनकी पुलिसकर्मियों से झड़प हो गईष पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठी, आंसू गैस और पैलेट गन दागे।

पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से मेट्रो के 18 स्टेशन, कनॉट प्लेस की दुकानें बंद करवा दी थी।

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