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कौन थे संविधान विशेषज्ञ डॉ सुभाष कश्यप, जिनका 97 साल की उम्र में हुआ निधन?
संविधान विशेषज्ञ डॉ सुभाष कश्यप का 97 साल की उम्र में निधन

कौन थे संविधान विशेषज्ञ डॉ सुभाष कश्यप, जिनका 97 साल की उम्र में हुआ निधन?

लेखन गजेंद्र
Jun 04, 2026
03:13 pm

क्या है खबर?

लोकसभा के पूर्व महासचिव और संविधान के जानकार डॉ सुभाष कश्यप का गुरुवार को 97 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कार्डियो-पल्मोनरी अरेस्ट की वजह से दम तोड़ा। डॉक्टर कश्यप भारत के जाने-माने संवैधानिक विशेषज्ञ होने के साथ राजनीतिक जानकार और संसदीय मामलों के विशेषज्ञ माने जाते थे। उत्तर प्रदेश के बिजनौर में जन्मे कश्यप ने 100 से अधिक पुस्तकें और 500 से अधिक शोध लेख लिखे हैं। उनको 2015 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

निधन

प्रधानमंत्री नेहरू के समय से लेकर 37 साल तक सेवा की

कश्यप 1983 से 1990 तक लोकसभा के महासचिव रहे हैं। उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पहली लोकसभा से लेकर 9वीं लोकसभा तक 37 साल तक भारतीय संसद की सेवा की है। कश्यप का जन्म 1929 में बिजनौर के चांदपुर में हुआ था। उन्होंने किशोरावस्था में आजादी के लिए बिजनौर-मेरठ में स्थानीय स्तर पर छात्रों के आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय, अमेरिका, ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड में उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त की थी।

परिचय

संसद से ली थी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति

कश्यप ने इलाहाबाद में पत्रकार के रूप में अपना करिअर शुरू किया। इसके बाद वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षक रहे और हाईकोर्ट में वकालत की ट्रेनिंग ली। उन्होंने 1953 में संसद सचिवालय में तैनाती ली और 31 दिसंबर, 1983 से 1990 तक 7वीं, 8वीं और 9वीं लोकसभा के महासचिव रहे। वर्ष 1990 में उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। वर्ष 1983 तक जिनेवा में इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन (IPU) के इंटरनेशनल सेंटर फॉर पार्लियामेंट्री डॉक्यूमेंटेशन के प्रमुख बनने वाले वे पहले भारतीय थे।

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पद

कई पदों पर रहे हैं कश्यप

कश्यप को संवैधानिक मामलों, संसदीय प्रक्रियाओं, राजनीतिक सुधारों और पंचायती राज पर विशेषज्ञ माना जाता था। वे भारत सरकार के पंचायती राज कानूनों और संस्थाओं के मानद संवैधानिक सलाहकार, संविधान की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आयोग के सदस्य और उसके ड्राफ्टिंग व एडिटोरियल कमिटी के चेयरमैन रहे हैं। हाल में 'एक राष्ट्र एक चुनाव' के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में बनी उच्च स्तरीय समिति के सदस्य रहे थे।

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सम्मान

कई सम्मान से नवाजे गए हैं कश्यप

कश्यप को कानून और राजनीति विज्ञान में उनके काम के लिए 2 बार मोतीलाल नेहरू पुरस्कार और 'पार्लियामेंट्री प्रोसीजर प्रैक्टिस, प्रेसिडेंट्स एंड प्रिविलेज' नाम के शोध के लिए जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप मिली थी। उनको सैन फ्रांसिस्को, साउ पाउलो, ब्राज़ील की एकेडमी ऑफ़ ऑनरेरी ऑर्डर की डिग्री से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 1965-1966 तक वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी कांग्रेसनल फेलो के रूप में कार्य किया और एक अंतरराष्ट्रीय सिविल सेवक के रूप में अंतरराष्ट्रीय संसदीय दस्तावेजीकरण केंद्र का नेतृत्व किया।

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