भारत की चीन पर निर्भरता नहीं हो रही कम, 2021-2026 तक व्यापार घाटा 53 प्रतिशत बढ़ा
क्या है खबर?
भारत की चीनी आयात पर निर्भरता कम होती नहीं दिख रही है, जिससे भारत का व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। पिछले 5 साल में यह घाटा बढ़कर 53 प्रतिशत हो गया है। यह खुलासा केंद्र सरकार की ओर से राज्यसभा में दिए गए जवाब से हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2021-22 में व्यापार घाटा 73.31 अरब डॉलर (लगभग 6.99 लाख करोड़ रुपये) था, जो 2025-26 में बढ़कर 112.16 अरब डॉलर (लगभग 10.69 लाख करोड़ रुपये) हो गया।
जवाब
क्या पूछा था सवाल?
राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने पिछले 5 साल में चीन से भारत द्वारा आयातित वस्तुओं का कुल मूल्य, भारत के कुल व्यापारिक आयात में चीन से आयात का प्रतिशत हिस्सा और भारत-चीन के बीच 5 साल में व्यापार घाटे से जुड़ा सवाल पूछा था।
इस पर वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि भारत के कुल विदेशी आयात में चीन की हिस्सेदारी 16.96 प्रतिशत हो गई है, जो 2021-22 में 15.43 प्रतिशत थी।
घाटा
कितने रुपये का आयात बढ़ा?
आंकड़े बताते हैं कि केंद्र की ओर से चलाए जा रहे 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' के बावजूद भी चीन से आयात पर भारत की निर्भरता बढ़ी है।
वर्ष 2021-22 के बीच चीन से भारत का आयात करीब 9.01 लाख करोड़ रुपये था, जो 2022-23 में बढ़कर करीब 9.39 लाख करोड़, 2023-24 में बढ़कर करीब 9.70 लाख करोड़, 2024-25 में बढ़कर करीब 10.81 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा और 2025-26 में 12.55 लाख करोड़ रुपये का आयात हुआ है।
घाटा
चीन के साथ व्यापार घाटा कितना बढ़ा?
वित्तीय वर्ष 2021-22 चीन से होने वाला आयात 73.31 बिलियन डॉलर (6.99 लाख करोड़ रुपये) था, जो 2025-26 में बढ़कर 112.6 बिलियन डॉलर (लगभग 10.69 लाख करोड़ रुपये) हो गया।
आंकड़ों के मुताबिक, 2021-22 में व्यापार घाटा 6.99 लाख करोड़ रुपये था, जो 2022-23 में बढ़कर 7.93 लाख करोड़ रुपये, 2023-24 में 8.11 लाख करोड़ रुपये, 2024-25 में 9.45 लाख करोड़ रुपये और 2025-26 में बढ़कर 10.69 लाख करोड़ रुपये हो गया।
साझेदार
चीन बना सबसे बड़ा व्यापार साझेदार
चीन अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है। अप्रैल में बीजिंग ने लगातार 11वें महीने में अपनी बढ़त को मजबूत बनाए रखा था।
इसकी पुष्टि भारत में चीनी राजदूत जू फिहोंग ने की थी। उन्होंने बताया था कि अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच चीन अमेरिका को बहुत पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना है।
चीन भारत के साथ लगभग 10 अरब डॉलर की बढ़त बनाए हुए है।
फायदा
FDI में संशोधन से चीन को मिला फायदा
फोर्ब्स के मुताबिक, भारत ने अपना व्यापार घाटा कम करने के लिए 6 साल बाद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति (FDI) में संशोधन किया है। हालांकि, इसका फायदा चीन को ज्यादा हो रहा है।
संशोधन से चीन समेत भारत के पड़ोसी देशों की 10 प्रतिशत से कम हिस्सेदारी वाली कंपनियों को अब सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं। उनका निवेश स्वाचालित रूट से हो जाएगा।
वर्ष 2020 में गलवान घाटी हिंसा और कोविड-19 के बाद नियम सख्त हुए थे।
निर्यात
चीन भारत को यह सामान करता है निर्यात
चीन भारत को इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्यात करता है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा टेलीफोन, कंप्यूटर, इंटीग्रेटेड सर्किट्स का है।
इसके बाद मशीनरी, न्यूक्लियर रिएक्टर्स, बॉयलर्स, ऑर्गेनिक केमिकल्स, प्लास्टिक, आर्टिफिशियल रेजिन्स, आयरन-स्टील के सामान, खाद, लिथियम-आयन बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स शामिल है।
चीन से इनका निर्यात भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है, लेकिन इससे व्यापार घाटा भी बढ़ता है।
भारत चीन को आयरन ओर, रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, समुद्री उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, मसाले, कास्टर ऑयल, टेलीकॉम उपकरण, कॉपर उत्पाद भेजता है।
ट्विटर पोस्ट
राज्यसभा में पूछा गया सवाल
चीन के साथ व्यापार घाटे में भारी बढ़ोतरी
— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) August 10, 2026
चीन के साथ भारत के व्यापार घाटे को लेकर सांसद @manojkjhadu के 7 अगस्त 2026 को पूछे गए सवाल के ही जवाब में वाणिज्य और उद्योग मंत्री @JitinPrasada की तरफ़ से दिया गया आंकड़ा बताता है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में से 73.31 बिलियन था लेकिन… https://t.co/B9OgNC5f2A pic.twitter.com/nRglaHT2eq