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कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली के अस्पतालों में अव्यवस्थाओं का आलम, CAG रिपोर्ट में खुलासा
कोरोना वायरस महामारी में दिल्ली के अस्प्तालों में था अव्यवस्थाओं का आलम (तस्वीर: फाइल)

कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली के अस्पतालों में अव्यवस्थाओं का आलम, CAG रिपोर्ट में खुलासा

Jan 05, 2026
04:13 pm

क्या है खबर?

दिल्ली की सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन पर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट ने कोरोना वायरस महामारी के दौरान गंभीर कमियों को उजागर किया गया है। इसमें अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी, ICU की तैयारी और आपातकालीन प्रतिक्रिया से संबंधित कमिंया प्रमुख हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन विफलताओं ने महामारी के चरण पर होने के दौरान अस्पतालों और मरीजों के लिए संकट को और बढ़ा दिया।

रिपोर्ट

CAG रिपोर्ट में क्या कहा गया है?

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार ने दिसंबर 2023 तक आयुष्मान भारत योजना को लागू नहीं किया, जिससे निवासियों को 2018 में शुरू की गई इस प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पाया। स्वास्थ्य विभागों में कर्मचारियों की कमी भी बड़ी खामी रही है। मार्च 2022 तक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग में 21 प्रतिशत कर्मचारियों की कमी थी, जबकि स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय में 37.55 प्रतिशत कर्मचारियों की कमी थी।

कर्मचारी

कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे थे अस्पताल

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2022 तक प्रमुख अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ की 21 प्रतिशत कमी थी। इसी तरह जीबी पंत अस्पताल में डॉक्टरों के 34 प्रतिशत, GTB अस्पताल में 28 प्रतिशत, लोक नायक अस्पताल में 20 प्रतिशत और भगवान महावीर अस्पताल में 33 प्रतिशत पद खाली थे। पैरामेडिकल स्टाफ की 38 प्रतिशत कमी थी। ऑडिट में बताया गया कि 27 जिला स्तरीय अस्पतालों में नाक-कान-गला, दंत, शिशु रोग विशेषज्ञ समेत 10 विभागों में डॉक्टरों की 33 प्रतिशत पद खाली थे।

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आवश्यक सेवाएं

सभी जिला स्तरीय अस्पतालों में उपलब्ध नहीं थी आवश्यक सेवाएं

रिपोर्ट के अनुसार, जिला स्तरीय अस्पतालों में ब्लड बैंक, ICU, ऑक्सीजन सुविधा, मुर्दाघर और एम्बुलेंस जैसी सहायक सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं। नमूना लिए गए चार में से 3 अस्पतालों में एम्बुलेंस सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं और केंद्रीकृत दुर्घटना एवं आघात सेवा (CDA) की एम्बुलेंस का एक बड़ा हिस्सा आवश्यक उपकरणों के बिना चल रहा था। 27 अस्पतालों में से 14 में ICU, 16 में ब्लड बैंक, 8 में ऑक्सीजन, 15 में मुर्दाघर और 12 में एम्बुलेंस सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं।

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उपकरण

इन प्रमुख उपकरणों के बिना संचालित थे ICU

रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस महामारी में 27 जिला अस्पतालों की ICU यूनिट ECG मशीन, ट्रांसपोर्ट मॉनिटर और BiPAP मशीन जैसे कार्यात्मक उपकरणों से जूझ रही थी। चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम का ठेका पाने वाली एजेंसी ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए आवश्यक अपटाइम और ऑक्सीजन रिसाव के लिए स्वीकार्य डाउनटाइम बनाए रखने में विफल रही। हालांकि, बाद में एजेंसी पर जुर्माने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन यह उपाय मौतों का मुआवजा नहीं हो सकता।

तैयारी

महामारी के दौरान पूरी नहीं हो पाई थी आपातकालीन तैयारियां

रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान आपातकालीन तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए गठित राज्य त्वरित प्रतिक्रिया दल अपने निर्धारित कार्यों को पूरा करने में विफल रहा। दिल्ली सरकार द्वारा प्रत्येक कोरोना संक्रमित की मृत्यु की ऑडिट के लिए एक ऑडिट समिति गठित की गई थी, लेकिन समिति ने जनवरी से दिसंबर 2021 तक एक भी मामले का विश्लेषण नहीं किया। यह वही अवधि थी, जिसमें ऑक्सीजन की कमी के कारण कथित तौर पर सर्वाधिक मौतें हुई थीं।

सुविधा

अस्पतालों में था मूलभूत सुविधाओं का अभाव

रिपोर्ट में कोरोना महामारी संबंधित खामियों के अलावा अस्पतालों की खराब मूलभूत सुविधाओं पर भी प्रकाश डाला गया है। रिपोर्ट के अनुसार, लोक नायक अस्पताल के प्रतीक्षा क्षेत्र में शौचालय या तो बंद थे या अस्वच्छ थे। चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में नवजात शिशुओं को NICU में भर्ती कराने वाली माताओं के लिए बैठने, पीने के पानी या शौचालय की सुविधा नहीं थी। लोक नायक अस्पताल में बड़ी सर्जरी के लिए तीन महीने का प्रतीक्षा समय दिया जा रहा था।

दवा

दवा की खरीद और आपूर्ति भी थी चिंताजनक

रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय खरीद एजेंसी दवाइयों और उपकरणों के लिए अस्पतालों के अनुरोधों को पूरा करने में असमर्थ थी, जो दवा नीति के कार्यान्वयन में गंभीरता की कमी को दर्शाता है। दवाइयां जैक्सन लैबोरेटरीज, एक्यूलाइफ हेल्थकेयर, मान फार्मास्यूटिकल्स और सेंटूरियन लैबोरेटरीज सहित ब्लैकलिस्टेड फर्मों से खरीदी गई थीं। आपूर्ति आदेश में सूचीबद्ध 22 अस्पतालों में से केवल 7 को ही रेबीज रोधी वैक्सीन की आपूर्ति की गई थी, जो बेहद चिंताजनक स्थिति थी।

बिस्तर

अस्पतालों में प्रति व्यक्ति बिस्तरों का अनुपात 0.68 प्रतिशत रहा

रिपोर्ट में कहा गया कि 2021-22 में दिल्ली में प्रति व्यक्ति बिस्तरों का अनुपात 0.68 था, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति की प्रति 1,000 जनसंख्या पर 2 बिस्तरों की सिफारिश से काफी कम है। दिल्ली में कुल 59,957 बिस्तरों में से 29,348 यानी लगभग 50 प्रतिशत निजी अस्पतालों में थे, जो दर्शाता है कि आबादी का एक बड़ा हिस्सा निजी स्वास्थ्य सुविधाओं पर निर्भर है। कुल मिलाकर, CAG रिपोर्ट ने दिल्ली की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में संरचनात्मक कमजोरियों को दर्शाया है।

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