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बॉम्बे हाई कोर्ट से नितिन गडकरी को राहत, E20 से जुड़े AI वीडियो हटाने का आदेश
बॉम्बे हाई कोर्ट से नितिन गडकरी को राहत

बॉम्बे हाई कोर्ट से नितिन गडकरी को राहत, E20 से जुड़े AI वीडियो हटाने का आदेश

लेखन गजेंद्र
Aug 05, 2026
12:18 pm

क्या है खबर?

महाराष्ट्र की बॉम्बे हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को बदनाम करने वाले आपत्तिजनक वीडियो हटाने का आदेश दिया है। गडकरी ने केंद्र सरकार के इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) कार्यक्रम से उन्हें और उनके परिवार को जोड़ने वाली मानहानिकारक और डीपफेक सामग्री को हटाने की मांग की थी। साथ ही, गडकरी ने गूगल, एक्स, मेटा और यूट्यूब के खिलाफ मुकदमा करने की भी मांग की थी, जिसकी अनुमति उन्हें मिल चुकी थी।

सुनवाई

कोर्ट ने क्या कहा?

कोर्ट ने अपने अंतरिम फैसले में कहा, "इसी तरह का एक वीडियो इंस्टाग्राम रील पर मौजूद है। अन्य सामग्री भी है। जिस सामग्री को वादी हटवाना चाहता है, उसके बारे में मैं केवल इतना ही कह सकता हूं कि वह बेहद घृणित और अपमानजनक है। ऐसी सामग्री का सार्वजनिक मंच पर कोई स्थान नहीं होना चाहिए। आवेदक ने अंतरिम राहत के लिए मामला बनाया है। मेटा और गूगल ने सामग्री हटाने पर सहमति जताई है।"

मांग

गडकरी ने क्या की थी मांग?

गडकरी ने कथित बदनाम करने वाली सामग्री के प्रकाशन और सर्कुलेशन के खिलाफ स्थाई और जरूरी रोक लगाने की मांग की है।

इसमें ऐसी सामग्री भी शामिल है जिसमें गाली-गलौज वाली भाषा, उनकी सहमति के बिना उनके नाम, इमेज, चेहरे के फीचर्स और आवाज की नकल करते हुए AI से बदले गए ऑडियो और वीडियो का इस्तेमाल किया गया है।

केंद्रीय मंत्री जा दावा है कि इस मटीरियल से उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचा है।

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रोक

गडकरी ने कोर्ट में क्या कहा?

गडकरी की ओर से पेश वकील संदीप एस लड्डा ने कोर्ट में कहा कि बदनाम करने वाली सामग्री मुंबई में अलग-अलग इंटरनेट प्लेटफॉर्म के जरिए सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को मिल रहा था।

उन्होंने इसे ऑनलाइन झूठा, गुमराह और बदनाम करने वाला कंटेंट बताते हुए कहा कि आरोप बेबुनियाद हैं क्योंकि इथेनॉल-ब्लेंडिंग पॉलिसी पेट्रोलियम मंत्रालय चलाती है, न कि सड़क और परिवहन मंत्रालय, जिसके गडकरी प्रमुख हैं।

उन्होंने कहा कि यह ऑनलाइन सामग्री मुंबई समेत पूरे देश में उपलब्ध है।

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